# FSSAI का डाबर पर बड़ा एक्शन: ‘100% प्योर’ और ‘100% नेचुरल’ दावों वाले कई प्रोडक्ट्स की बिक्री पर रोक, 15 दिन में मांगी रिपोर्ट
नई दिल्ली, 4 अगस्त 2026। देश की प्रमुख एफएमसीजी कंपनी डाबर इंडिया लिमिटेड को भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने बड़ा झटका दिया है। खाद्य नियामक ने कंपनी के कई लोकप्रिय खाद्य उत्पादों पर किए गए ‘100% Pure’, ‘100% Natural’, ‘100% Organic’ और ‘100% Purity Guaranteed’ जैसे दावों को भ्रामक मानते हुए इनके साथ बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने का आदेश जारी किया है।
FSSAI का कहना है कि ऐसे दावे फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (एडवरटाइजिंग एंड क्लेम्स) रेगुलेशंस, 2018 के अनुरूप नहीं हैं और उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकते हैं। नियामक ने डाबर को निर्देश दिया है कि वह आदेश का पालन करते हुए 15 दिनों के भीतर ‘एक्शन टेकन रिपोर्ट’ (ATR) भी जमा करे।
यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब खाद्य उत्पादों की लेबलिंग, विज्ञापन और गुणवत्ता संबंधी दावों पर FSSAI लगातार सख्ती बरत रहा है।
किन प्रोडक्ट्स पर हुई कार्रवाई?
FSSAI के आदेश के दायरे में डाबर के कई लोकप्रिय उत्पाद शामिल हैं। इनमें प्रमुख रूप से—
- डाबर शहद (Honey)
- डाबर ऑर्गेनिक हनी
- गाय का घी
- वर्जिन कोकोनट ऑयल
- तिल का तेल
- हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर
- नारियल पानी
- नारियल दूध (Coconut Milk)
- अन्य खाद्य उत्पाद जिन पर ‘100%’ संबंधी दावे किए गए थे
इन उत्पादों पर लगे ‘100%’ वाले दावों को लेकर FSSAI ने आपत्ति जताई है।
आखिर क्यों लिया गया यह फैसला?
FSSAI के अनुसार, जांच के दौरान पाया गया कि डाबर की वेबसाइट और कुछ उत्पादों की पैकेजिंग पर ऐसे दावे किए जा रहे थे, जिनकी पुष्टि वैज्ञानिक रूप से नहीं की जा सकती।
इनमें शामिल हैं—
- 100% Natural
- 100% Pure
- 100% Purity Guaranteed
- 100% Organic
- 100% Tender Coconut Water
नियामक का कहना है कि इस तरह के दावे उपभोक्ताओं को यह विश्वास दिलाते हैं कि उत्पाद पूरी तरह शुद्ध या प्राकृतिक है, जबकि ऐसे दावों के लिए ठोस वैज्ञानिक प्रमाण और नियामकीय आधार आवश्यक होता है।
FSSAI ने क्या कहा?
खाद्य सुरक्षा प्राधिकरण के अनुसार, ‘100%’ शब्द की कोई स्पष्ट कानूनी परिभाषा नहीं है।
यही कारण है कि—
- “100% प्योर”
- “100% नेचुरल”
- “100% ऑर्गेनिक”
जैसे दावे यदि पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाणों से समर्थित न हों, तो उन्हें भ्रामक माना जा सकता है।
FSSAI ने स्पष्ट किया कि किसी भी खाद्य उत्पाद पर किया गया दावा—
- सत्य होना चाहिए,
- स्पष्ट होना चाहिए,
- वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित होना चाहिए,
- और उपभोक्ता को भ्रमित नहीं करना चाहिए।
‘जैविक भारत’ लोगो पर भी आपत्ति
जांच के दौरान एक और महत्वपूर्ण अनियमितता सामने आई।
FSSAI के मुताबिक—
- डाबर हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर
- डाबर ऑर्गेनिक हनी
पर ‘जैविक भारत’ का लोगो इस्तेमाल किया गया था, जबकि संबंधित उत्पादों के लिए आवश्यक वैध ऑर्गेनिक अनुमोदन उपलब्ध नहीं था।
नियामक ने इसे भी नियमों का उल्लंघन माना है।
कंपाउंड फूड पर ‘100% प्योरिटी’ का दावा भी गलत
FSSAI ने डाबर के होममेड कोकोनट मिल्क को लेकर भी आपत्ति जताई है।
यह उत्पाद एक कंपाउंड फूड यानी मिश्रित खाद्य पदार्थ की श्रेणी में आता है।
नियमों के अनुसार—
ऐसे उत्पादों पर “100% Purity” जैसा दावा करना अनुमत नहीं है।
इसके बावजूद इस तरह की मार्केटिंग किए जाने पर नियामक ने कार्रवाई की है।
पहले भी जारी किया गया था नोटिस
FSSAI ने बताया कि यह पहली बार नहीं है जब कंपनी को चेतावनी दी गई हो।
प्राधिकरण के अनुसार—
- पहले भी डाबर को नोटिस जारी किया गया था।
- कंपनी से भ्रामक ‘100%’ दावों को हटाने को कहा गया था।
- लेकिन संतोषजनक सुधारात्मक कार्रवाई नहीं की गई।
इसी कारण अब नियामक ने प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है।
15 दिन में देनी होगी रिपोर्ट
FSSAI ने डाबर इंडिया को निर्देश दिया है कि—
- संबंधित उत्पादों की बिक्री पर तत्काल रोक लगाए।
- सभी भ्रामक दावों की समीक्षा करे।
- वेबसाइट और पैकेजिंग में आवश्यक बदलाव करे।
- 15 दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) जमा करे।
यदि कंपनी निर्धारित समय में संतोषजनक जवाब नहीं देती है, तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई भी की जा सकती है।
डाबर ने क्या कहा?
डाबर इंडिया ने अपने शुरुआती बयान में कहा है कि—
- कंपनी को FSSAI का नोटिस प्राप्त हो चुका है।
- नोटिस में उठाए गए सभी बिंदुओं की समीक्षा की जा रही है।
- कंपनी नियामकीय आवश्यकताओं के अनुसार आगे की कार्रवाई करेगी।
फिलहाल कंपनी ने विस्तृत प्रतिक्रिया जारी नहीं की है।
FSSAI के नियम क्या कहते हैं?
खाद्य सुरक्षा नियमों के अनुसार किसी भी कंपनी को उत्पाद पर ऐसा दावा करने से पहले पर्याप्त वैज्ञानिक आधार प्रस्तुत करना होता है।
क्या किया जा सकता है?
- वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित दावा।
- स्पष्ट और सत्य जानकारी।
- उपभोक्ता को भ्रमित न करने वाली लेबलिंग।
क्या नहीं किया जा सकता?
- बिना प्रमाण के ‘100%’ जैसे दावे।
- बिना अनुमति ‘जैविक भारत’ लोगो का उपयोग।
- मिश्रित खाद्य पदार्थों पर ‘100% प्योरिटी’ का दावा।
- ऐसा विज्ञापन जिससे उपभोक्ता भ्रमित हो।
नियम तोड़ने पर क्या कार्रवाई हो सकती है?
FSSAI के पास कई प्रकार की नियामकीय शक्तियां हैं।
उल्लंघन पाए जाने पर—
- नोटिस जारी किया जा सकता है।
- लेबल और विज्ञापन बदलने का आदेश दिया जा सकता है।
- संबंधित उत्पादों की बिक्री रोकी जा सकती है।
- आर्थिक दंड लगाया जा सकता है।
- गंभीर मामलों में लाइसेंस संबंधी कार्रवाई भी संभव है।
पहले भी कंपनियों पर हुई है कार्रवाई
हाल के वर्षों में FSSAI और न्यायालय भ्रामक विज्ञापनों को लेकर काफी सख्त रुख अपनाते रहे हैं।
पतंजलि मामला (2024):
सुप्रीम कोर्ट ने स्वास्थ्य संबंधी भ्रामक विज्ञापनों को लेकर कड़ी टिप्पणी की थी। कंपनी को सार्वजनिक माफी मांगनी पड़ी और कई विज्ञापन वापस लेने पड़े।
‘हेल्थ ड्रिंक’ विवाद (2024):
FSSAI ने स्पष्ट किया था कि “Health Drink” नाम की कोई वैधानिक खाद्य श्रेणी मौजूद नहीं है। इसके बाद कई ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स ने अपनी उत्पाद श्रेणियों में बदलाव किया।
उपभोक्ताओं के लिए क्या है संदेश?
विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी खाद्य उत्पाद की खरीद केवल पैकेजिंग पर लिखे आकर्षक दावों के आधार पर नहीं करनी चाहिए। उपभोक्ताओं को हमेशा—
- उत्पाद का लेबल ध्यान से पढ़ना चाहिए,
- FSSAI लाइसेंस नंबर देखना चाहिए,
- सामग्री (Ingredients) की जानकारी जांचनी चाहिए,
- और केवल प्रमाणित गुणवत्ता वाले उत्पादों का ही चयन करना चाहिए।
बढ़ रही है भ्रामक विज्ञापनों पर सख्ती
पिछले कुछ वर्षों में FSSAI ने खाद्य उत्पादों के विज्ञापनों और लेबलिंग को लेकर निगरानी तेज कर दी है। डिजिटल प्लेटफॉर्म, ई-कॉमर्स वेबसाइट और सोशल मीडिया पर किए जाने वाले प्रचार भी अब नियामक की निगरानी में हैं।
डाबर के खिलाफ की गई यह कार्रवाई इस बात का संकेत है कि भविष्य में खाद्य कंपनियों को अपने उत्पादों पर किए जाने वाले प्रत्येक दावे के लिए ठोस वैज्ञानिक और नियामकीय आधार प्रस्तुत करना होगा। उपभोक्ता हितों की सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए FSSAI की यह सख्ती आने वाले समय में पूरे खाद्य उद्योग के लिए महत्वपूर्ण संदेश मानी जा रही है।



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