’13 साल से कम उम्र… सोशल मीडिया से दूर?’ बच्चों की डिजिटल सुरक्षा पर दिल्ली हाईकोर्ट में बड़ी कानूनी जंग
नाबालिगों की सोशल मीडिया पहुंच पर रोक की मांग वाली PIL दाखिल, आयु सत्यापन व्यवस्था लागू करने की उठी मांग
नई दिल्ली: कम उम्र के बच्चों की सोशल मीडिया तक आसान पहुंच और उससे जुड़े संभावित खतरों को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है। याचिका में केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि 13 वर्ष से कम आयु के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर प्रभावी रोक लगाने के लिए स्पष्ट कानूनी व्यवस्था और अनिवार्य आयु सत्यापन प्रणाली लागू की जाए।
याचिका में कहा गया है कि अधिकांश सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म आयु सीमा निर्धारित तो करते हैं, लेकिन उसकी वास्तविक जांच नहीं होने के कारण बच्चे गलत जानकारी देकर आसानी से अकाउंट बना लेते हैं। इससे वे साइबर बुलिंग, अश्लील सामग्री, ऑनलाइन शोषण, डेटा गोपनीयता के उल्लंघन और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों के संपर्क में आ जाते हैं। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि यह स्थिति बच्चों के सुरक्षित जीवन और गरिमा से जुड़े संवैधानिक अधिकारों को प्रभावित करती है।
यह याचिका एक तीन वर्षीय बच्चे की मां कीर्ति दुआ और बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. शरद गुप्ता द्वारा दाखिल की गई है। उन्होंने अदालत से बच्चों के लिए सुरक्षित डिजिटल माहौल सुनिश्चित करने और सोशल मीडिया कंपनियों पर सख्त आयु सत्यापन व्यवस्था लागू कराने की मांग की है।
सुनवाई के दौरान यह मामला पहले मुख्य न्यायाधीश की खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध हुआ, लेकिन बाद में न्यायमूर्ति तेजस कारिया ने स्वयं को इस मामले की सुनवाई से अलग कर लिया। अब इस याचिका पर 5 अगस्त को नई पीठ सुनवाई करेगी।
गौरतलब है कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट भी इस मुद्दे पर दायर एक याचिका में कह चुका है कि सोशल मीडिया पर आयु सीमा तय करना और उससे जुड़े नियम बनाना सरकार और संसद के नीति निर्धारण का विषय है। हालांकि शीर्ष अदालत ने बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा के महत्व को भी स्वीकार किया था।
अब दिल्ली हाईकोर्ट में शुरू हुई यह कानूनी बहस केवल सोशल मीडिया उपयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि देश में बच्चों की डिजिटल सुरक्षा, ऑनलाइन अधिकारों और टेक कंपनियों की जवाबदेही को लेकर भविष्य की नीति तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है।



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