घर की रसोई पर महंगाई की मार: टमाटर, प्याज, खाद्य तेल और LPG ने बढ़ाया थाली का खर्च, आम परिवारों का बजट बिगड़ा
नई दिल्ली: देशभर में महंगाई का असर अब सीधे आम लोगों की रसोई तक पहुंच गया है। जून 2026 में घर पर तैयार होने वाली शाकाहारी और मांसाहारी दोनों तरह की थाली की लागत में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। खाद्य पदार्थों की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि, रसोई गैस (LPG) के महंगे होने और आवश्यक सब्जियों के दाम बढ़ने से घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है।
हालिया आर्थिक रिपोर्ट के अनुसार, जून 2026 में शाकाहारी थाली की औसत लागत पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 5 प्रतिशत बढ़ी है, जबकि मांसाहारी थाली की लागत में करीब 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले महीनों में मौसम और आपूर्ति की स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो खाद्य महंगाई का दबाव कुछ समय तक बना रह सकता है।
टमाटर और प्याज बने महंगाई के सबसे बड़े कारण
रसोई के सबसे जरूरी खाद्य पदार्थों में शामिल टमाटर और प्याज की कीमतों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखने को मिली है। जून 2026 के दौरान टमाटर के दाम में पिछले महीने की तुलना में लगभग 17 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि प्याज करीब 8 प्रतिशत महंगा हो गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, फरवरी और मार्च में सामान्य से अधिक तापमान रहने के कारण टमाटर की खेती प्रभावित हुई। कई क्षेत्रों में बुआई और रोपाई में देरी हुई, जिससे उत्पादन कम रहा और बाजार में आपूर्ति घट गई। परिणामस्वरूप टमाटर की खुदरा कीमतें तेजी से बढ़ीं।
बताया जा रहा है कि पिछले वर्ष जून में टमाटर की औसत कीमत लगभग 32 रुपये प्रति किलोग्राम थी, जो इस वर्ष बढ़कर करीब 42 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई। यानी एक वर्ष में लगभग 31 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
खाद्य तेल और LPG ने भी बढ़ाया रसोई का खर्च
सब्जियों के अलावा खाद्य तेल और घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में आई तेजी ने भी घरेलू खर्च को प्रभावित किया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और ऊर्जा उत्पादों की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर भारत के उपभोक्ताओं तक पहुंचा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला में आई बाधाओं के कारण खाद्य तेलों तथा LPG की लागत बढ़ी, जिसका सीधा असर घरों के मासिक रसोई बजट पर पड़ा है।
आलू ने दी कुछ राहत, लेकिन महंगाई का असर बरकरार
जहां अधिकांश खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़े हैं, वहीं आलू की कीमतों में कुछ गिरावट दर्ज की गई। नई रबी फसल बाजार में आने से आलू अपेक्षाकृत सस्ता हुआ, जिससे थाली की कुल लागत पर बढ़ोतरी का असर कुछ हद तक कम हुआ। हालांकि टमाटर, प्याज, खाद्य तेल और गैस की बढ़ी कीमतों के सामने यह राहत पर्याप्त साबित नहीं हुई।
मांसाहारी थाली भी हुई महंगी
गैर-शाकाहारी भोजन करने वाले परिवारों पर भी महंगाई का असर साफ दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के अनुसार ब्रॉयलर चिकन की कीमतों में वृद्धि होने से नॉन-वेज थाली की लागत बढ़ी है।
पोल्ट्री उद्योग से जुड़े जानकारों के अनुसार भीषण गर्मी के कारण पक्षियों की मृत्यु दर बढ़ी, उनका वजन अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच सका और कई पोल्ट्री फार्मों ने नए चूजों की संख्या कम कर दी। इन कारणों से बाजार में चिकन की उपलब्धता प्रभावित हुई और कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई।
एक महीने में भी बढ़े खाद्य पदार्थों के दाम
सिर्फ सालाना आधार पर ही नहीं, बल्कि मई 2026 की तुलना में जून 2026 के दौरान भी कई आवश्यक वस्तुओं के दाम बढ़े हैं। टमाटर में लगभग 17 प्रतिशत, प्याज में 8 प्रतिशत, आलू में करीब 5 प्रतिशत तथा ब्रॉयलर चिकन में लगभग 2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इससे यह संकेत मिलता है कि खाद्य महंगाई का दबाव लगातार बना हुआ है।
दालों की कीमतों पर भी बढ़ सकता है दबाव
विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में दालों की कीमतों में भी तेजी देखने को मिल सकती है। उड़द और मूंग जैसी प्रमुख दालों का शुरुआती स्टॉक सीमित बताया जा रहा है। वहीं महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और कर्नाटक जैसे प्रमुख उत्पादक राज्यों में मौसम की अनिश्चितता उत्पादन को प्रभावित कर सकती है।
यदि फसल अनुमान से कम रहती है तो दालों की कीमतों में और वृद्धि होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
जुलाई और अगस्त में राहत की संभावना कम
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई और अगस्त के दौरान टमाटर और प्याज की कीमतों में तत्काल बड़ी राहत मिलने की संभावना कम है। मानसून की स्थिति, परिवहन व्यवस्था और विभिन्न राज्यों से होने वाली आपूर्ति आने वाले सप्ताहों में कीमतों की दिशा तय करेगी।
यदि बारिश सामान्य से कम रही या परिवहन व्यवस्था प्रभावित हुई तो आवश्यक खाद्य पदार्थों की कीमतें और बढ़ सकती हैं।
सितंबर से मिल सकती है राहत
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मौसम सामान्य रहा तो सितंबर से स्थिति में सुधार देखने को मिल सकता है। खरीफ फसल बाजार में आने के साथ टमाटर, प्याज और अन्य सब्जियों की आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है। दक्षिण और पश्चिम भारत से नई खेप बाजार में पहुंचने पर कीमतों में धीरे-धीरे नरमी आ सकती है।
घरेलू बजट पर बढ़ रहा दबाव
खाद्य महंगाई का सबसे अधिक असर मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ रहा है। रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं के महंगे होने से मासिक बजट प्रभावित हो रहा है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि परिवार मौसमी सब्जियों का अधिक उपयोग करें, जरूरत के अनुसार ही खरीदारी करें, खाद्यान्न और दालों की समय रहते खरीदारी करें तथा भोजन की बर्बादी से बचें।
किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर
आने वाले महीनों में रसोई का खर्च मुख्य रूप से कुछ महत्वपूर्ण कारकों पर निर्भर करेगा। इनमें मानसून की स्थिति, खरीफ फसलों का उत्पादन, टमाटर और प्याज की उपलब्धता, खाद्य तेलों के अंतरराष्ट्रीय दाम, घरेलू LPG की कीमतें तथा वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां प्रमुख रहेंगी।
यदि कृषि उत्पादन सामान्य रहता है और आपूर्ति में सुधार होता है तो वर्ष की दूसरी छमाही में खाद्य महंगाई कुछ कम हो सकती है। हालांकि फिलहाल आम उपभोक्ताओं को रसोई के बढ़ते खर्च से राहत मिलने के लिए अभी कुछ समय इंतजार करना पड़ सकता है।



Leave a Reply
Want to join the discussion?Feel free to contribute!