नीट पेपर लीक पर लगेगी लगाम! एनटीए तैयार कर रहा नया सिस्टम, हजारों सवालों के बैंक से बनेगा प्रश्नपत्र
नई दिल्ली। मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी में पेपर लीक विवाद के बाद परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने की दिशा में बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो गई है। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) अब प्रश्नपत्र तैयार करने की पूरी प्रक्रिया में आमूलचूल परिवर्तन करने पर विचार कर रही है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत प्रश्न तैयार करने वाले विशेषज्ञों को यह तक नहीं बताया जाएगा कि उनके द्वारा तैयार किए गए सवाल किस परीक्षा में उपयोग किए जाने हैं। इस कदम का उद्देश्य प्रश्नपत्र निर्माण प्रक्रिया में गोपनीयता बढ़ाना और पेपर लीक की संभावनाओं को न्यूनतम स्तर तक पहुंचाना है।
नीट-यूजी परीक्षा में कथित पेपर लीक की घटनाओं के बाद एनटीए की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे थे। इसके बाद केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों के स्तर पर परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जा रही है। इसी क्रम में एक नई प्रणाली पर विचार किया जा रहा है, जिसमें विषय विशेषज्ञों द्वारा तैयार किए गए प्रश्नों को एक केंद्रीकृत डिजिटल प्रश्न बैंक में सुरक्षित रखा जाएगा। बाद में इन्हीं हजारों प्रश्नों में से चयन कर विभिन्न परीक्षाओं के अंतिम प्रश्नपत्र तैयार किए जाएंगे।
प्रस्ताव के अनुसार विषय विशेषज्ञों को केवल अपने विषय से संबंधित प्रश्न तैयार करने का कार्य सौंपा जाएगा। उन्हें यह जानकारी नहीं दी जाएगी कि प्रश्न मेडिकल प्रवेश परीक्षा, इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा या किसी अन्य राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा के लिए उपयोग किए जाने हैं। इससे प्रश्नपत्र निर्माण की संवेदनशील प्रक्रिया से जुड़े लोगों की संख्या काफी कम हो जाएगी और गोपनीयता का स्तर बढ़ेगा।
सूत्रों के अनुसार एनटीए हजारों प्रश्नों का एक व्यापक डेटाबेस तैयार करने की योजना बना रहा है। इस डेटाबेस में विभिन्न विषयों और कठिनाई स्तरों के प्रश्न शामिल होंगे। परीक्षा के समय एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत इन्हीं प्रश्नों के समूह से अंतिम प्रश्नपत्र तैयार किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि यदि प्रश्नों का चयन अंतिम चरण में सीमित लोगों की निगरानी में किया जाए तो प्रश्नपत्र लीक होने की आशंका काफी हद तक कम हो सकती है।
इस प्रस्ताव के पीछे हाल ही में सामने आए पेपर लीक मामलों की जांच भी एक प्रमुख कारण मानी जा रही है। जांच एजेंसियों द्वारा की गई कार्रवाई में कई अनुवादकों और विषय विशेषज्ञों के नाम सामने आए थे। इससे यह सवाल खड़ा हुआ कि प्रश्नपत्र निर्माण की पारंपरिक व्यवस्था में कई स्तरों पर मानवीय हस्तक्षेप होने के कारण गोपनीयता प्रभावित हो सकती है। इसी चुनौती से निपटने के लिए नई संरचना विकसित करने की कोशिश की जा रही है।
सरकारी सूत्रों का कहना है कि परीक्षा सुरक्षा केवल कागज या डिजिटल माध्यम का मुद्दा नहीं है, बल्कि पूरी प्रणाली के डिजाइन और संचालन से जुड़ा विषय है। इसलिए ऐसी व्यवस्था तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है जिसमें मानवीय हस्तक्षेप कम से कम हो और हर स्तर पर जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। अधिकारियों का मानना है कि परीक्षा प्रणाली में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति अपनाकर ही पेपर लीक जैसी घटनाओं को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है।
नई व्यवस्था लागू होने पर प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया कई चरणों में विभाजित होगी। पहले विषय विशेषज्ञ प्रश्न तैयार करेंगे, फिर उन्हें गुणवत्ता और कठिनाई स्तर के आधार पर वर्गीकृत किया जाएगा। इसके बाद प्रश्नों को सुरक्षित डिजिटल रिपॉजिटरी में संग्रहीत किया जाएगा। अंतिम प्रश्नपत्र निर्माण के समय एक सीमित और अधिकृत टीम निर्धारित मानकों के अनुसार प्रश्नों का चयन करेगी।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह मॉडल प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है तो राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बढ़ सकती है। साथ ही छात्रों और अभिभावकों का परीक्षा प्रणाली पर भरोसा भी मजबूत होगा। हालांकि इस प्रस्ताव को लागू करने से पहले तकनीकी सुरक्षा, डेटा प्रबंधन और निगरानी तंत्र को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता होगी।
फिलहाल यह प्रस्ताव विचाराधीन है और आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए इसकी व्यवहार्यता पर चर्चा जारी है। यदि इसे मंजूरी मिलती है तो अगले वर्ष आयोजित होने वाली नीट समेत अन्य प्रमुख परीक्षाओं में प्रश्नपत्र निर्माण की प्रक्रिया पूरी तरह नए स्वरूप में दिखाई दे सकती है। शिक्षा जगत की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और एनटीए इस प्रस्ताव को किस रूप में लागू करते हैं और इससे परीक्षा सुरक्षा व्यवस्था में कितना सुधार आता है।




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