हरियाणा से संचालित अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़, अमेरिका के नागरिकों को बनाया जा रहा था निशाना
फर्जी कॉल सेंटर पर बड़ी कार्रवाई, 21 लोग हिरासत में
हरियाणा के पंचकूला में पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। सेक्टर-2 मार्केट स्थित एक ऑफिस पर देर रात की गई छापेमारी में पुलिस ने 21 लोगों को हिरासत में लिया है, जबकि इनमें से चार को मुख्य आरोपी के रूप में गिरफ्तार किया गया है।
यह कार्रवाई साइबर क्राइम यूनिट द्वारा सोमवार देर रात शुरू की गई और मंगलवार सुबह लगभग 6 बजे तक जारी रही। इस दौरान पुलिस ने फर्जी कॉल सेंटर से भारी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री और नकदी बरामद की।
अमेजन अधिकारी बनकर अमेरिकी नागरिकों से ठगी
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि यह गिरोह खुद को विश्व प्रसिद्ध ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन का कस्टमर केयर अधिकारी बताकर अमेरिका के नागरिकों को निशाना बनाता था।
कॉल सेंटर में काम करने वाले कर्मचारी अमेरिकी ग्राहकों को फोन कर उन्हें तकनीकी या सुरक्षा संबंधी समस्या का डर दिखाते थे। इसके बाद उनसे क्रेडिट कार्ड विवरण, बैंकिंग जानकारी और अन्य संवेदनशील डाटा हासिल कर लिया जाता था, जिसका उपयोग बाद में आर्थिक धोखाधड़ी के लिए किया जाता था।
अमेरिकी समय के अनुसार चलता था पूरा ऑपरेशन
इस साइबर फ्रॉड नेटवर्क की कार्यप्रणाली बेहद सुनियोजित पाई गई है। कॉल सेंटर का संचालन भारतीय समय के अनुसार नहीं बल्कि अमेरिकी समय के अनुसार किया जाता था।
सूत्रों के अनुसार, काम शाम लगभग 7 बजे शुरू होकर रात 3 बजे तक चलता था, ताकि अमेरिकी नागरिकों से संपर्क करना आसान रहे और संदेह की संभावना कम हो।
20 से अधिक युवाओं को दी गई थी विशेष ट्रेनिंग और सैलरी
इस अवैध कॉल सेंटर में 20 से अधिक युवक-युवतियों को नौकरी पर रखा गया था। इन्हें अंग्रेजी भाषा में दक्षता के आधार पर चुना गया और 20 से 25 हजार रुपये मासिक वेतन दिया जाता था।
भर्ती के बाद कर्मचारियों को लगभग एक सप्ताह से 10 दिन तक विशेष प्रशिक्षण दिया जाता था, जिसमें उन्हें विदेशी नागरिकों से बातचीत करने, उन्हें विश्वास में लेने और तकनीकी शब्दावली का उपयोग करने की ट्रेनिंग दी जाती थी।
छापेमारी में भारी नकदी और आधुनिक उपकरण बरामद
पुलिस कार्रवाई के दौरान मौके से भारी मात्रा में सामग्री बरामद की गई, जिनमें शामिल हैं—
- 19 कंप्यूटर सिस्टम
- 3 लैपटॉप
- 11.30 लाख रुपये नकद
- 16 मोबाइल हैंडसेट
- 3 वॉकी-टॉकी
- 2 वाई-फाई राउटर
- 3 POS मशीनें
- एक नोट गिनने की मशीन
- सोने के आभूषण
बरामद सामग्री से स्पष्ट है कि यह नेटवर्क लंबे समय से संगठित तरीके से संचालित हो रहा था।
मुख्य आरोपियों की भूमिका पर जांच तेज
पुलिस ने नवदीप, अक्षय टिक्कू, रजा और अंकुर कपूर को मुख्य आरोपी के रूप में चिन्हित किया है। जांच में यह भी सामने आया है कि नेटवर्क को संचालन स्तर पर वकील नवदीप और रोड सेफ्टी ऑर्गेनाइजेशन (RSO) से जुड़े अंकुर कपूर द्वारा नियंत्रित किया जा रहा था।
बताया जा रहा है कि आरोपी सामाजिक और पेशेवर मंचों पर सक्रिय रहते थे, जिससे उन पर संदेह करना मुश्किल हो जाता था।
सामाजिक प्रतिष्ठा की आड़ में चलता था अपराध
पुलिस जांच में यह भी संकेत मिले हैं कि आरोपी सार्वजनिक आयोजनों और सामाजिक अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाते थे। विशेषकर सड़क सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी के कारण वे प्रशासनिक और पुलिस स्तर पर भी संपर्क बनाए रखते थे।
इस स्थिति का लाभ उठाकर वे लंबे समय तक साइबर फ्रॉड को गुप्त रूप से संचालित करते रहे।
पुलिस रिमांड पर आगे खुलासों की संभावना
पंचकूला पुलिस कमिश्नर पंकज नैन ने बताया कि यह कार्रवाई साइबर क्राइम टीम की एक बड़ी सफलता है। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक जांच में कई अहम तथ्य सामने आए हैं, लेकिन पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच आवश्यक है।
उन्होंने संकेत दिए कि गिरफ्तार आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जाएगी, जिससे इस अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड रैकेट के और भी बड़े खुलासे संभव हैं।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला हो सकता है नेटवर्क
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यह मामला केवल एक कॉल सेंटर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके तार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े हो सकते हैं। विदेशी नागरिकों को निशाना बनाकर की गई यह ठगी कई देशों तक फैली हो सकती है, जिसकी जांच अब साइबर एजेंसियों के सहयोग से की जाएगी।
पंचकूला में हुई यह कार्रवाई न केवल एक बड़े साइबर फ्रॉड का पर्दाफाश करती है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि किस तरह आधुनिक तकनीक का दुरुपयोग कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगठित ठगी की जा रही है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है।



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