पंचकूला में नियमों को ठेंगा दिखाती नगर निगम की गाड़ी, बिना नंबर प्लेट सड़कों पर दौड़ती मिली — ट्रैफिक पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी उठे गंभीर सवाल
पंचकूला। शहर में कानून व्यवस्था और यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी जिन संस्थाओं पर है, उन्हीं से जुड़े एक चौंकाने वाले मामले ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पंचकूला नगर निगम की कूड़ा उठाने वाली एक गाड़ी पिछले लंबे समय से बिना स्थायी नंबर प्लेट के सड़कों पर दौड़ती हुई देखी जा रही है। यह मामला न केवल नगर निगम की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगाता है, बल्कि ट्रैफिक पुलिस की भूमिका को भी कटघरे में खड़ा करता है।
तीन साल से अस्थायी नंबर पर चल रही गाड़ी
मिली जानकारी के अनुसार, उक्त गाड़ी के पीछे की ओर वर्ष 2023 की अस्थायी नंबर प्लेट लगी हुई है, जिस पर “T0423 HR 98402” अंकित है। हैरानी की बात यह है कि गाड़ी के आगे की तरफ कोई भी नंबर प्लेट नहीं लगी हुई है। सवाल यह उठता है कि आखिर तीन साल बीत जाने के बावजूद इस वाहन को स्थायी नंबर प्लेट क्यों नहीं दी गई? क्या संबंधित विभाग ने इस ओर कभी ध्यान नहीं दिया, या फिर जानबूझकर नियमों की अनदेखी की जा रही है?

कर्मचारियों के पास थी नंबर प्लेट, फिर भी नहीं लगाई
जब इस गाड़ी में मौजूद नगर निगम के कर्मचारियों से इस बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने स्वीकार किया कि उनके पास गाड़ी की पीली (येलो) नंबर प्लेट मौजूद है। उन्होंने प्लेट दिखायी भी, लेकिन जब उनसे पूछा गया कि इसे वाहन पर क्यों नहीं लगाया गया है, तो उन्होंने कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। उल्टा, सवालों से बचने के लिए कर्मचारी मौके से गाड़ी लेकर निकल गए।
यह व्यवहार कई तरह की शंकाओं को जन्म देता है। यदि नंबर प्लेट उपलब्ध थी, तो उसे वाहन पर लगाने में क्या बाधा थी? क्या यह महज लापरवाही है या इसके पीछे कोई और वजह छिपी है?
ट्रैफिक पुलिस पर उठे सवाल
इस पूरे मामले में ट्रैफिक पुलिस की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। आम जनता के लिए यातायात नियमों का उल्लंघन करना महंगा साबित होता है। बिना नंबर प्लेट या अधूरी नंबर प्लेट वाली गाड़ियों पर ट्रैफिक पुलिस तत्काल चालान काटती है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर नगर निगम की इस गाड़ी पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
क्या ट्रैफिक पुलिस सरकारी वाहनों के प्रति नरम रुख अपनाती है? यदि हां, तो यह कानून के समान रूप से लागू होने के सिद्धांत के खिलाफ है। नियम सभी के लिए समान होने चाहिए, चाहे वह आम नागरिक हो या कोई सरकारी संस्था।

हादसे की स्थिति में कैसे होगी पहचान?
इस मामले का एक और गंभीर पहलू यह है कि यदि यह गाड़ी किसी दुर्घटना में शामिल हो जाती है, तो उसकी पहचान कैसे की जाएगी? बिना नंबर प्लेट के वाहन की पहचान करना बेहद मुश्किल हो सकता है, जिससे पीड़ित को न्याय मिलने में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क सुरक्षा के लिहाज से हर वाहन का स्पष्ट और वैध पंजीकरण होना अनिवार्य है। यह न केवल कानून का पालन है, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा से भी जुड़ा हुआ मुद्दा है।
प्रशासन की चुप्पी पर भी सवाल
इस पूरे मामले पर अब तक नगर निगम या ट्रैफिक पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। प्रशासन की यह चुप्पी भी कई सवाल खड़े करती है। क्या संबंधित विभाग इस मामले को गंभीरता से नहीं ले रहा, या फिर इसे दबाने की कोशिश की जा रही है?
पंचकूला में सामने आया यह मामला सरकारी तंत्र की लापरवाही और दोहरे मापदंडों को उजागर करता है। एक ओर जहां आम जनता पर सख्ती दिखाई जाती है, वहीं दूसरी ओर सरकारी वाहन खुलेआम नियमों की धज्जियां उड़ाते नजर आते हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या भविष्य में ऐसे मामलों की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं या नहीं।


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