निगम की 160 करोड़ फर्जी FD मामला : दूसरे आरोपी की मिली 6 दिन की रिमांड
कहीं छोटी मछलियों को पकड़ कर बड़े मगरमच्छों को बचाने की कोशिश तो नहीं की जा रही !
कांग्रेस की पत्रकार वार्ता पर भी पड़ गया मैनेजमेंट का साया
पंचकूला नगर निगम भ्रष्टाचार की फैक्ट्री है यह कहना है हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का । हालांकि वह एक राजनीतिक व्यक्तित्व है और उनका बयान राजनीतिक से जुड़ा हो सकता है पर सच्चाई यही है पंचकूला नगर निगम धीरे-धीरे भ्रष्टाचार का निगम बनता जा रहा है । बीते दो महीनो के अंदर ही दो बड़े बैंक फ्रॉड के मामले सामने आने के बाद इस चर्चा को और मजबूती मिली है । फरवरी महीने में 100 करोड रुपए का एक बैंक गड़बड़ घोटाले का मामला , तो मार्च में फर्जी फिक्स डिपाजिट वह भी 160 करोड रुपए की मामला सामने आ चुका है । मीडिया की सुर्खियों में मामला आए हुए 5 दिन बीतने जा रहे हैं जबकि इसके लगभग एक हफ्ता पहले से निगम के अधिकारियों को इस पूरे मामले की भनक लग चुकी थी और अंदर खाने सारे कागजात की जांच पड़ताल भी चल रही थी । यानी कुल मिलाकर अगर देखा जाए तो मीडिया में मामला आने के पहले अधिकारियों की नजर में आ चुका था और लगभग 12 दिन बीच इस मामले को हो चुके हैं । और अब तक सिर्फ दो संदिग्ध आरोपी जिन्हें सामान्य चर्चा में छोटी मछलियां कहां जा रहा है वही गिरफ्तार हो पाए हैं और जिनके ऊपर गंभीर आरोप लग रहे हैं यानी सामान्य चर्चा में जिन्हें बड़े मगरमच्छ कहा जा रहा है , उन तक अभी जांच एजेंसियों के हाथ नहीं पहुंचे हैं । या फिर उन हाथों को पहुंचने के पहले ही रोका जा रहा है यानी कि इस पूरे मामले को मैनेजमेंट करने की पूरी कोशिश की जा रही है । जिसका जीता जागता सबूत बृहस्पतिवार को मिल चुका है । कांग्रेस की तरफ से बुलाई गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिसमें दावा किया गया था कि इस पूरे मामले को लेकर कांग्रेस सबूत सामने रखेगी पर ना तो प्रेस कॉन्फ्रेंस में सबूत सामने रख पाई और तो और विधायक चंद्र मोहन जो कि खुद कांग्रेसी है और पंचकूला में विपक्ष की नुमाएंगी करते हैं , पत्रकार वार्ता में इस गंभीर मामले पर मात्र 22 सेकंड बोले । इसी से ऐसा प्रतीत होने लगा की प्रेस कॉन्फ्रेंस होने के पहले ही इस मामले को कथित आरोपियों के द्वारा मैनेज कर लिया गया ।
हालांकि अभी आरोपियो जिनके खाते में पैसे ट्रांसफर हो चुके हैं उनके नाम भी अभी तक सार्वजनिक नहीं किए जा रहे हैं पर जनता लगातार इस बात की अब सरकार से अपेक्षा कर रही है कि आखिरकार वह नाम क्यों छुपाए जा रहे हैं , वह नाम सार्वजनिक क्यों नहीं किए जा रहे कहीं ऐसा तो नहीं कि आरोपियों में से कोई सत्ता पक्ष जुड़ा हुआ हो इस वजह से उसको बचाने की कोशिश की जा रही हो ।
भाजपा नेताओं की चुप्पी सबसे आश्चर्यजनक
इस पूरे मामले को लेकर किसी भी भाजपा नेता ने अब तक ना तो कोई सवाल उठाए हैं ना ही मुख्यमंत्री से और कड़ी जांच की मांग की है । हालांकि जांच चल रही है पर जांच के नतीजे जिस तरीके से सामने आ रहे हैं उसे पर कहीं ना कहीं संदेह व्यक्त हो रहा है ।
निगम चुनाव पर पड़ सकता है असर अगर विपक्ष लपक ले इस मुद्दे को तो
अगले कुछ महीनो में नगर निगम के चुनाव होने हैं और इस मुद्दे को लेकर जनता जानना चाहती है कि आखिरकार वह लोग कौन है जिन्होंने जनता के टैक्स के पैसे डकार लिए अब यह विपक्ष के ऊपर डिपेंड करता है कि वह इस मुद्दे को किस तरीके से जनता के बीच लेकर जाता है ।
कुल मिलाकर ऐसा लगने लगा है कि इस मामले पर भले जांच कमेटी बना दी गई है , परंतु कहीं ना कहीं पहन के पीछे से मैनेज करने का खेल भी चल रहा है ।
पंचकूला धार्मिक नगरी से बनता जा रहा है घोटालों का शहर- ओ पी सिहाग
जननायक जनता पार्टी पंचकूला के जिला अध्यक्ष ओ पी सिहाग का कहना है कि कुछ सालों पहले पंचकूला एक सुन्दर,स्वच्छ, शांत एवं व्यवस्थित शहर के नाम से जाना जाता था। परंतु पिछले 6-7 सालों से यहां की आबो हवा एवं फिजा बिल्कुल बदल गई है। जहा इस पूरे क्षेत्र में क्राइम बढ़ा है वहीं य़ह शहर तरक्की एवं साफ़ सफाई के मामले में दूसरे शहरो से पिछड़ते जा रहा है।
दूसरी ओर य़ह शहर पूरे प्रदेश एवं क्षेत्र में धार्मिक कार्यक्रमों का हब भी बनता जा रहा है ।यहां लोग हर तरह के होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों में बड़ी संख्या में भाग लेने के अलावा आयोजकों एवं बाबाओं को मोटा चंदा एवं दान देते हैं। इसी वज़ह से धार्मिक गुरुओं , बाबाओं , कथा वाचको एवं मठाधीशों का ज्यादा झुकाव इस शहर की तरफ बढता जा रहा है। जिसकी वजह से लोग पंचकूला को धार्मिक नगरी भी कहने लगे हैं।

जजपा ज़िला अध्यक्ष ओ पी सिहाग ने कहा कि पिछले कुछ महीनों से विभिन्न सरकारी विभागों एवं बैंकों में लगातार हो रहे घोटालों ने इस धार्मिक नगरी को घोटालों का शहर बना दिया है। सिहाग ने कहा कि पंचकूला जिले में करोडों रुपये के खेर के पेड़ों की अवैध रूप से काट कर बेचने के घोटाले की स्याही अभी सूखी ही नहीं थी 590 करोड़ रुपये का आई डी एफ सी फर्स्ट बैंक का घोटाला हुआ जिसमें विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारियों एवं कर्मचारियों की मिलीभगत से बैंक कर्मियों ने य़ह घोटाला किया।अभी इस घोटाले की जांच चल रही थी तो इसी दौरान नगर निगम पंचकूला के 159 करोड़ रुपये की एफ डी जो कोटक महिंद्रा बैंक मे सालो पहले जमा करायी गयी थी वो पैसे भी घोटाला करने वाले बैंक कर्मियों , सम्भवतः कुछ नगर निगम के कर्मचारियों एवं दलाल किस्म के लोगों ने आपस में बन्दर बांट करके हजम कर लिए । जजपा ज़िला अध्यक्ष सिहाग ने कहा कि नगर निगम पंचकूला के सफाई ठेके की , रोड़ स्वीपिंग मशीनो एवं कई दूसरे विभागों में छोटे मोटे घोटालों की शिकायतें गाहे बगाहे आती रहती है जिस ओर किसी का ज्यादा ध्यान नहीं जाता।
अब सवाल यह उठता है कि सेंकड़ों करोड़ रुपये की इतनी बड़ी राशि क्या बैंक या सरकारी विभागों के कर्मचारी अकेले हजम कर गए या राजनीतिक रसूख रखने वाले लोग एवं सरकार के बड़े अधिकारी भी इस नेक्सस में शामिल हैं। य़ह एक जांच का विषय है। जजपा ज़िला अध्यक्ष सिहाग ने सरकार से मांग की है कि इन दोनों बैंकों के इतने बड़े घोटाले की जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी से करवाई जाए जिसमें लगभग 750 करोड़ का गबन होने बारे आशंका है तथा इसमे छोटे कर्मचारियों के अतिरिक्त बड़ी बड़ी मछलियां शामिल होने बारे चर्चाओं का बाज़ार गर्म है ।
उन्होंने कहा कि जजपा य़ह मांग करती है इस सारे मामले को तुरंत सी बी आई के हवाले कर देना चाहिए ताकि कोई भी कितना भी बड़ा व्यक्ति इन दोनों घोटालों में शामिल हो वो बच न पाये।
पंचकूला नगर निगम घोटाले पर बढ़ा राजनीतिक तापमान, कांग्रेस ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग
पंचकूला नगर निगम में कथित 160 करोड़ रुपये के घोटाले को लेकर हरियाणा की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राव नरेंद्र सिंह ने इस मुद्दे पर प्रदेश सरकार और प्रशासनिक तंत्र को घेरते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं।
प्रेस बयान में उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच चुका है और लगातार नए घोटाले सामने आ रहे हैं। उनके अनुसार, पंचकूला नगर निगम का मामला केवल वित्तीय अनियमितता नहीं, बल्कि सुनियोजित तरीके से जनता के धन के दुरुपयोग का उदाहरण है।
राव नरेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि इस प्रकरण से सरकारी संस्थानों में जवाबदेही की कमी उजागर होती है। उन्होंने कहा कि जनता से विभिन्न प्रकार के शुल्क वसूले जा रहे हैं, लेकिन यह राशि विकास कार्यों के बजाय भ्रष्ट तंत्र में खप रही है।
कांग्रेस नेता ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी आशंका जताई कि विस्तृत जांच में घोटाले की राशि और अधिक सामने आ सकती है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मामले में पारदर्शिता नहीं लाई गई, तो कांग्रेस इस मुद्दे को सड़कों से लेकर विधानसभा तक उठाएगी। साथ ही, उन्होंने सरकार से तुरंत स्थिति स्पष्ट करने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग की।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी जनता के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष जारी रखेगी।
पंचकूला में एफडी घोटाले पर उठे सवाल, संयुक्त जांच की मांग तेज
चंडीगढ़ के बाद अब पंचकूला नगर निगम में सामने आए कथित एफडी घोटाले को लेकर मामला गरमाता जा रहा है। सेवानिवृत्त अधीक्षक और समाजसेवी राजबीर सिंह भारतीय ने इसे एक संगठित भ्रष्टाचार तंत्र बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया दी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि चंडीगढ़ में सामने आए फर्जी एफडी मामले की तर्ज पर ही पंचकूला में भी समान पैटर्न दिखना गंभीर साजिश की ओर इशारा करता है। उनके अनुसार, यह केवल संयोग नहीं बल्कि एक सक्रिय गिरोह की कार्यप्रणाली हो सकती है।
राजबीर सिंह भारतीय ने ट्राइसिटी—चंडीगढ़, पंचकूला और मोहाली—के नगर निगमों में पिछले 10 वर्षों के वित्तीय निवेशों की संयुक्त केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि केवल अलग-अलग एफआईआर दर्ज करने से सच्चाई सामने नहीं आएगी।
उन्होंने अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि इतने बड़े स्तर पर वित्तीय लेनदेन बिना आंतरिक मिलीभगत के संभव नहीं है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि जांच सीमित दायरे में रही तो मामला उच्च न्यायालय तक ले जाया जाएगा।
राजबीर सिंह भारतीय ने दोषियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई और अवैध संपत्ति जब्त करने की मांग करते हुए कहा कि यदि जल्द पारदर्शिता नहीं लाई गई तो इस मुद्दे पर जन-आंदोलन खड़ा किया जाएगा।


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