पंचकूला में सरकारी जमीनों पर करना है अवैध कब्जा तो सिर्फ एक ही शर्त : जुड़ जाइए सत्ता से, अधिकारी जी आंखे मूंद लेंगे !
कहने को तो पंचकूला हरियाणा की अघोषित राजधानी कहा जाता है और यहां पर हरियाणा की आधी से ज्यादा सरकार रहती है सत्ता के मुखिया यानी मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी हफ्ते में दो से तीन दिन पंचकूला में किसी न किसी कार्यक्रम में आते-जाते रहते हैं और जिम्मेदार अधिकारी मुख्यमंत्री साहब की जी हजूरी में व्यस्त रहते हैं और यही वजह पंचकूला में अमीरों का अवैध अतिक्रमण हट नहीं पा रहा क्योंकि यह अमीर कहीं ना कहीं सत्ताधारी दल से जुड़े हुए हैं । और अधिकारी भी ऐसे अमीरों पर हाथ डालने से बचते हैं क्योंकि अधिकारियों का मानना है कि अगर इनका अतिक्रमण हटाने के लिए अतिक्रमण वाली गाड़ी घूमी नहीं की वह जिस लाल बत्ती वाली गाड़ी में घूम रहे हैं उसकी जगह पर सिंपल गाड़ी में घूमना पड़ेगा लाल बत्ती वाली गाड़ी की जो दबदबा है वह खत्म हो जाएगा ।
सब कुछ जानने के बावजूद भी पंचकूला में अधिकारी अवैध अतिक्रमण हटाने में अक्षम साबित हो रहे हैं अवैध आक्रमण हटे भी तो कैसे हटे क्योंकि उस पर कब्जा भी भाजपा के कथित नेताओं ने कर रखा है।
पंचकूला में मुख्य तौर पर तीन विभाग है हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी यानी जिसे छोटे शब्दों में हुड्डा कहा जाता है पीएमडीए जिसे पंचकूला मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी और तीसरा विभाग है पंचकूला नगर निगम ।
पंचकूला शहरी क्षेत्र में जितनी भी जमीन है वह इन तीनों ही विभागों के अंतर्गत आती है किसी के पास कोई एरिया आता है तो किसी के पास कोई । परंतु ज्यादातर जमीनों के रखरखाव की जिम्मेदारी हुड्डा और नगर निगम के पास ही है ।
और मजे की बात अतिक्रमण हटाने वाले के दस्ते भी हुड्डा और नगर निगम के पास ही है । अतिक्रमण हटाने वाले दस्ते अक्सर गरीबों का अतिक्रमण हटाते हुए तो देखे जा सकते हैं उनकी फोटो वीडियो तो आती रहती है पर कभी भी अतिक्रमण की गाड़ी इन अमीरों के जो सत्ताधारी दल से जुड़े होते हैं उनकी तरफ नहीं जाती। क्योंकि डर अतिक्रमण वाली गाड़ी के ड्राइवर को भी लगता है।
बात शुरू करते है सबसे पहले हुड्डा से । हुड्डा का पंचकूला मुख्यालय सेक्टर 6 में है और सेक्टर 6 के मुख्यालय से कुछ करीब यानी लगभग डेढ़ किलोमीटर की दूरी में सत्ता से जुड़े नेताओं के दो ऐसे होटल है जिन्होंने होटल के बाहर पूरा कब्जा कर रखा है ।
मजे की बात तो यह है कि कई बार तो अवैध अतिक्रमण हटाने की जिम्मेदारी रखने वाले अधिकारी इन होटल में आते-जाते भी है क्योंकि खुद भाजपा के नेता तो छोड़िए मुख्यमंत्री इन होटल में आते जाते हैं और सीएम साहब के आने की वजह से अधिकारियों का आना जाना रहता है फिर भी अधिकारियों को वह अवैध अतिक्रमण नजर नहीं आता।
और तो और एक नेता के होटल के बिल्कुल बगल में एक दिन पहले ही नगर निगम ने चमचमाता हुआ पब्लिक टॉयलेट शुरू किया है इस पब्लिक टॉयलेट की तारीफ की अगर बात की जाए तो पंचकूला का शायद ही कोई ऐसा पब्लिक टॉयलेट होगा जिसमें इतनी सुविधा होगी यहां तक की जूते पॉलिश करने की मशीन और इनवर्टर भी पब्लिक टॉयलेट में लगाया गया है पर पब्लिक टॉयलेट दिखाई कैसे पड़े क्योंकि उसके आगे तो सत्ता धारी दल के नेता जी ने अवैध कब्जा कर रखा है पब्लिक को पता ही नहीं चल सकता कि यहां पर कोई पब्लिक टॉयलेट भी है । यह सब कुछ अधिकारियों को पता है पर सत्ताधारी दल के आगे सब नतमस्तक है और सच जानते हुए भी कुछ नहीं कर पा रहे।
उपरोक्त दो मामले तो सिर्फ उदाहरण के तौर पर लिखे गए है । पंचकूला का कोई सेक्टर ऐसा नहीं है जहां पर सत्ता धारी दल के नेताओं के अवैध अतिक्रमण से अछूता हो ।
किसी नेता का स्कूल के आसपास अतिक्रमण है तो किसी नेता ने रेस्टोरेंट के बाहर की जमीन पर अपना झंडा गाड़ रखा है , कोई मार्केट में अवैध रेहड़ियों लगवा करके अवैध वसूली कर रहा है तो किसी ने दुकानों के बाहर जो गलियारा बना होता है उसमें पूरा अवैध कब्जा कर रखा है । और सब कुछ अधिकारी मूकदर्शक बनकर देख रहे हैं । सच्चाई सबको पता है पर अधिकारियों को जी हजूरी करने से फुर्सत मिले तब तो इन सत्ताधारी दल के नेताओं का अवैध अतिक्रमण दिखाई पड़े ।
कुल मिलाकर कहानी सिर्फ यही कहती है कि अगर आप आम नागरिक हैं और अगर आपने सरकारी जमीन पर थोड़ा सा भी कब्जा कर लिया है तो वह अवैध अतिक्रमण है और उसे कभी भी तोड़ा जा सकता है पर अगर आप सत्ताधारी दल के नेता है तो आप थोड़ा नहीं जहां तक भी आपकी निगाह जाएगी वह जमीन आपकी ही कहलाएगी । यही पंचकूला की सच्चाई बयां करती हुई कहानी है ।


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