आपकी जेब तक पहुंचने वाली है युद्ध की आंच : ड्राई फ्रूट से लेकर दवाइयों और सर्जिकल सामान के दाम बढ़ने के संकेत
पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब भारत में साफ तौर पर दिखने लगा है। उद्योग से जुड़े जानकारों का कहना है कि कच्चे माल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी के चलते आने वाले समय में सूखे मेवे से लेकर दवाइयों और सर्जिकल उत्पादों के दाम 20 से 25 प्रतिशत तक बढ़ सकते हैं।
दवा निर्माण से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, फार्मास्यूटिकल सेक्टर में उपयोग होने वाले प्रमुख कच्चे पदार्थ—जैसे केमिकल कंपोनेंट्स, प्लास्टिक और एल्युमीनियम—की लागत में हाल के दिनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इन सामग्रियों का उपयोग न केवल दवा बनाने में बल्कि उनकी पैकेजिंग में भी बड़े पैमाने पर होता है, जिससे उत्पादन लागत पर सीधा दबाव पड़ रहा है।
आंकड़ों के मुताबिक, आम उपयोग की दवाओं में शामिल पैरासिटामोल के कच्चे माल की कीमत करीब 47% तक बढ़ चुकी है। इसी तरह डाइक्लोफेनाक में लगभग 54% और डाइक्लोफेनाक पोटेशियम में 33% तक उछाल दर्ज किया गया है। एंटीबायोटिक्स भी इस दबाव से अछूते नहीं हैं—अमॉक्सिसिलिन ट्राइहाइड्रेट की कीमत में करीब 45% और सिप्रोफ्लोक्सासिन में लगभग 62% तक वृद्धि देखी गई है।
दवा कारोबारियों का कहना है कि बढ़ती लागत के कारण नई खेप की दवाओं और सर्जिकल आइटम के दामों में तेजी आना तय है। हालांकि, पहले से स्टॉक में मौजूद उत्पादों की कीमतों में तत्काल बदलाव नहीं होना चाहिए, लेकिन कुछ जगहों पर पहले ही कीमतें बढ़ाए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में बाधाएं बनी रहती हैं, तो इसका असर लंबे समय तक भारतीय स्वास्थ्य क्षेत्र पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकार और नियामक एजेंसियों के सामने दवाओं की उपलब्धता और कीमतों को संतुलित रखना एक बड़ी चुनौती बन सकता है।
सप्लाई चैन बिगड़ने से दिल्ली में ड्राई फ्रूट्स 30% तक महंगे
पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर अब New Delhi के बाजारों में साफ नजर आने लगा है। खासकर ड्राई फ्रूट्स और आयातित फलों की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है, जिससे व्यापारियों और उपभोक्ताओं दोनों की चिंता बढ़ गई है।
व्यापारियों के मुताबिक, पिस्ता, किशमिश और अखरोट जैसे ड्राई फ्रूट्स के दामों में 20 से 30 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हुई है। ईरान से होने वाली सप्लाई प्रभावित होने और वैकल्पिक रूट से महंगा माल आने के कारण कीमतों में यह तेजी देखी जा रही है। बुधवार को पिस्ता जहां करीब 1,900 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 2,300 रुपये तक पहुंच गया है, वहीं काली किशमिश 250 से 450 और हरी किशमिश 550 से 700 रुपये प्रति किलो के स्तर पर पहुंच गई है। खुबानी के दाम भी लगभग दोगुने हो गए हैं।
बाजार सूत्रों का कहना है कि पहले से ऑर्डर किया गया माल भी समय पर नहीं पहुंच पा रहा, क्योंकि बंदरगाहों पर कंटेनर अटके हुए हैं। इससे सप्लाई में कमी और कीमतों में अस्थिरता बढ़ रही है। अंजीर, खजूर और मामरा बादाम जैसे अन्य उत्पाद भी महंगे हो रहे हैं, और आने वाले दिनों में और तेजी की आशंका जताई जा रही है।
फल बाजार भी इस असर से अछूता नहीं है। कीवी के दाम में भारी उछाल आया है, जबकि अंगूर और केला जैसे फलों की सप्लाई बाधित होने से बाजार में असंतुलन की स्थिति बन गई है।
आजादपुर मंडी के व्यापारियों के अनुसार, कुछ फलों की आवक बढ़ने से उनके दाम गिर रहे हैं, जबकि आयातित फलों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैश्विक सप्लाई चेन जल्द सामान्य नहीं हुई, तो इसका असर लंबे समय तक बाजार पर बना रह सकता है, जिससे व्यापारियों को नुकसान और उपभोक्ताओं पर महंगाई का दबाव और बढ़ेगा।



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