युवा ऊर्जा : राष्ट्र निर्माण की सबसे बड़ी ताकत
अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस हर साल 12 अगस्त को युवाओं की भूमिका, अधिकारों, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक विकास के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से मनाया जाता है। यदि हम यहां पर इस दिवस के इतिहास पर नजर डालें तो संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 17 दिसंबर 1999 को इसे मनाने की घोषणा की थी और पहली बार यह वर्ष 2000 में आयोजित हुआ था। यह दिवस युवाओं के अवसरों और चुनौतियों पर संवाद का एक महत्वपूर्ण मंच प्रस्तुत करता है।
युवा नवाचार और परिवर्तन की बड़ी शक्ति:-
हाल फिलहाल यहां यह कहना ग़लत नहीं होगा कि युवा किसी भी राष्ट्र की ऊर्जा, रचनात्मकता, नवाचार और परिवर्तन की सबसे बड़ी शक्ति होते हैं। वैश्विक स्तर पर 15 से 24 वर्ष आयु वर्ग के युवाओं की संख्या करीब 120 करोड़ है, जो विश्व की कुल आबादी का लगभग 16 प्रतिशत है। आज भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में अग्रणी है। भारत में 10 से 24 वर्ष के 38.2 करोड़ से अधिक युवा हैं, जबकि 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग की आबादी लगभग 37 करोड़ है, जो देश की कुल आबादी का लगभग 27 प्रतिशत है। यह विशाल युवा आबादी भारत के लिए एक बड़ा जनसांख्यिकीय लाभांश और सबसे बड़ी शक्ति है।
स्वामी विवेकानंद के युवाओं के बारे में विचार:-
स्वामी विवेकानंद युवाओं को राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति और परिवर्तन का प्रमुख माध्यम मानते थे। उनका मानना था कि युवाओं में अपार ऊर्जा, साहस, आत्मविश्वास और सृजनात्मक क्षमता होती है, जिसे सही दिशा देकर समाज का कायाकल्प किया जा सकता है। उनका प्रसिद्ध संदेश ‘उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए’ आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है। विवेकानंद के अनुसार शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्राप्त करना नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण, मन की शक्ति बढ़ाना और आत्मनिर्भर व्यक्तित्व गढ़ना है। वे युवाओं में शारीरिक व मानसिक दृढ़ता, अनुशासन, एकाग्रता और राष्ट्रसेवा की भावना को आवश्यक मानते थे। उनका युवा-दर्शन आज भी भारत की युवा शक्ति को जागृत करने के लिए अत्यंत प्रासंगिक है।
युवा शक्ति और आज का युग:-
आज के दौर में युवा शिक्षा, विज्ञान, तकनीक, उद्यमिता, खेल, कला, समाजसेवा और पर्यावरण संरक्षण जैसे अनेक क्षेत्रों में योगदान दे रहे हैं। डिजिटल युग ने उनके विचारों को वैश्विक मंच तक पहुँचाया है। हालांकि, बेरोजगारी, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की उपलब्धता, मानसिक दबाव, डिजिटल असमानता, जलवायु परिवर्तन और सामाजिक असमानता जैसी चुनौतियाँ भी उनके सामने खड़ी हैं। भारत के लिए युवा केवल भविष्य ही नहीं, बल्कि वर्तमान के निर्माण में भी सक्रिय भागीदार हैं। यदि इस युवा शक्ति को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक कौशल, रोजगार, उद्यमिता, विज्ञान-तकनीक और नवाचार के अवसर मिलें, तो यह भारत को आर्थिक एवं सामाजिक विकास की नई ऊँचाइयों पर ले जाकर आत्मनिर्भर और सशक्त बना सकती है। इसके साथ ही युवाओं में वैज्ञानिक सोच, संवेदनशीलता, अनुशासन, राष्ट्रप्रेम और सामाजिक उत्तरदायित्व का विकास भी अनिवार्य है।
निष्कर्षतः, अंतर्राष्ट्रीय युवा दिवस हमें याद दिलाता है कि युवाओं को अवसरों की तलाश करने वाला वर्ग नहीं, बल्कि अवसरों का निर्माण करने वाली शक्ति बनना होगा। युवा जितने जागरूक, कुशल, संवेदनशील और जिम्मेदार होंगे, समाज उतना ही मजबूत होगा। युवाओं की ऊर्जा को सही दिशा देना केवल सरकार या परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। युवा शक्ति को शिक्षा, कौशल, संस्कार और अवसरों से जोड़कर ही एक समावेशी, आत्मनिर्भर और सतत भविष्य का निर्माण संभव है।
सुनील कुमार महला, फ्रीलांस राइटर, कॉलमिस्ट व युवा साहित्यकार


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