बजट 2025: 12 लाख तक की आय पर टैक्स मुक्त, पिछले 4 साल का IT रिटर्न एकसाथ फाइल करने की सुविधा
नई दिल्ली | वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज लोकसभा में बजट 2025 पेश किया, जिसमें आम करदाताओं को बड़ी राहत दी गई। अब सालाना 12 लाख रुपये तक की आय पर कोई इनकम टैक्स नहीं लगेगा। इसके अलावा, करदाता अब पिछले 4 साल के आईटी रिटर्न को एक साथ फाइल कर सकेंगे। सीनियर सिटीजन्स के लिए टीडीएस की सीमा 50,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये कर दी गई है।
बजट 2025 के प्रमुख बिंदु:
- आयकर में राहत: 12 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगेगा।
- आईटी रिटर्न सुविधा: अब पिछले 4 साल का इनकम टैक्स रिटर्न एक साथ दाखिल किया जा सकेगा।
- सीनियर सिटीजन्स के लिए राहत: टीडीएस की सीमा 50,000 रुपये से बढ़ाकर 1 लाख रुपये की गई।
- कैंसर की दवाएं सस्ती: सरकार ने 36 जीवन रक्षक दवाओं पर कस्टम ड्यूटी पूरी तरह समाप्त कर दी।
- किसान क्रेडिट कार्ड: कर्ज की सीमा 3 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई।
- बिहार को विशेष लाभ:
- मखाना बोर्ड की स्थापना।
- 3 नए एयरपोर्ट बनाए जाएंगे।
- आईआईटी पटना का विस्तार किया जाएगा।
- नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फूड टेक्नोलॉजी की स्थापना होगी।
- कपड़ा उद्योग को बढ़ावा: 5 साल का विशेष मिशन लॉन्च होगा जिससे कपास की पैदावार बढ़ाई जाएगी।
- एमएसएमई सेक्टर: लोन गारंटी कवर 5 करोड़ से बढ़ाकर 10 करोड़ किया गया, जिससे 1.5 लाख करोड़ तक का कर्ज उपलब्ध होगा।
- स्टार्टअप्स के लिए राहत: लोन की सीमा 10 करोड़ से बढ़ाकर 20 करोड़ की गई, गारंटी फीस में भी कमी की गई।
- टॉय इंडस्ट्री को बढ़ावा: मेक इन इंडिया के तहत टॉय इंडस्ट्री को प्रोत्साहन मिलेगा।
- एआई में निवेश: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) रिसर्च और इनोवेशन के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रावधान।
- मेडिकल शिक्षा: अगले 5 साल में 75,000 मेडिकल सीटें बढ़ाई जाएंगी।
सरकार का डिजिटल और बुनियादी ढांचे पर जोर
- डिजिटल शिक्षा: सभी सरकारी स्कूलों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी दी जाएगी।
- पर्यटन को बढ़ावा: 50 नए पर्यटन स्थलों को विकसित किया जाएगा।
- हवाई कनेक्टिविटी: उडान योजना के तहत 120 नए गंतव्यों तक क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाई जाएगी।
- ईज ऑफ डूइंग बिजनेस: केवाईसी प्रक्रिया को सरल किया जाएगा और कंपनी मर्जर को आसान बनाने के लिए नई व्यवस्था लागू होगी।
वित्त मंत्री के अनुसार बजट के 5 प्रमुख लक्ष्य:
- आर्थिक विकास को गति देना।
- सुरक्षित और समावेशी विकास।
- निजी निवेश को बढ़ावा देना।
- घरेलू खर्च में वृद्धि करना।
- मध्यम वर्ग की खर्च करने की शक्ति को बढ़ाना।
इस बजट से आम जनता, किसानों, व्यापारियों, और उद्योगपतियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार के इन फैसलों का असर आने वाले समय में देश की अर्थव्यवस्था पर देखने को मिलेगा।
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