सीवरेज का गंदा पानी खुले में गिराने के मामले में मौका देखने के 1 महीने बाद भी प्रदूषण विभाग की कार्रवाई शून्य
एसटीपी के शट-डाउन के चलते घग्गर में गिराया जा रहा है शहर का अनट्रीटेड सीवरेज का पानी
संदीप सिंह बावा: शहर की आबादी 6 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है और इतनी बड़ी आबादी के लिए शहर में मात्र एक ही सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट है, वह भी 30 अप्रैल तक शट-डाउन पर है क्योंकि उसकी जरूरी मरम्मत चल रही है। जिसके चलते शहर का सीवरेज का अनट्रीटेड पानी घग्गर में गिराया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार मौजूदा 17 एमएमडी का एस्टीपी ज्यादा से ज्यादा एक लाख की आबादी का सीवरेज ही ट्रीट कर सकता है। लेकिन मौजूदा समय की बात करें तो शहर की आबादी 6 लाख का आंकड़ा पार कर चुकी है। जिसके लिए 70 से 80 एमएलडी एस्टीपी होना जरुरी है।
जिक्र योग्य है कि बहुत सी सोसाइटियों द्वारा सीवरेज का पानी खुले में गिराया जा रहा है, जिससे जगह-जगह पर प्रदूषण फैल रहा है। स्थानीय पटियाला रोड पर गुरुद्वारा नाभा साहिब के सामने भी खुले में सीवरेज का पानी देखा जा सकता है। दूसरी ओर अंबाला रोड पर माया गार्डन मैग्नीशिया प्रोजेक्ट के पास भी बहुत सी सोसाइटियों का सीवरेज का पानी खुले में गिराया जा रहा है। इस संबंधी पिछले महीने खबरें प्रकाशित होने के बाद प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की एसडीओ ने मौके का दौरा किया था और रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी थी लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद आज तक वहां पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। 2 दिन पहले फ्रेंड्स एनक्लेव के लोगों ने भी सीवरेज ओवरफ्लो की समस्या को लेकर नगर कौंसिल अधिकारियों के खिलाफ रोष प्रदर्शन किया था उसी दिन स्थानीय वीआईपी रोड की सोसाइटियों के लोगों ने भी सीवरेज के पानी की निकासी को लेकर रोष प्रदर्शन किया था। शहर में जगह-जगह सीवरेज ओवरफ्लो की समस्या के चलते बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है लेकिन नगर कौंसिल अधिकारी इसकी और कोई ध्यान नहीं दे रहे। दूसरी और प्रदूषण विभाग नगर कौंसिल से प्रदूषण फैलाने के आरोप में जुर्माना वसूल कर रहा है और अब तक करोड़ों रुपया जुर्माना लगा भी चुका है, लेकिन प्रदूषण विभाग द्वारा प्रदूषण फैलाने वाली सोसाइटियों के खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है, जबकि शहर की अधिकतर सोसाइटियों में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट है ही नहीं। अगर है तो वह चलता नहीं। बहुत सी सोसाइटीयां सीवरेज का डक तोड़कर खुले में सीवरेज का पानी छोड़ रही है लेकिन प्रदूषण विभाग इसे भी अनदेखा कर रहा है। आसपास में रहने वाले लोगों ने आरोप लगाया है के प्रदूषण विभाग बिल्डरों के साथ मिलकर उन्हें खुले में पानी छोड़ते हुए देखकर भी अनदेखा कर रहा है, इससे आसपास रहने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
पिछले करीब तीन महीने से एस्टीपी बंद होने के शहर की सीवरेज का दूषित पानी बिना ट्रीट किए घग्गर दरिया में गिराया जा रहा है। जबकि सुप्रीम कोर्ट के आदेश हैं के किसी भी नदी नाले या दरिया , नेचुरल वाटर रिसोर्स में दूषित पानी गिराना जुर्म है और उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। लेकिन बावजूद इसके शहर का दूषित पानी सीधा घग्गर में गिराया जा रहा है। हालंकि एनजीटी ने शहर की आबादी के हिसाब से एस्टीपी ना होने ओर दूषित पानी घग्गर गिराए जाने के चलते नगर परिषद को हर महीने लाखों रूपये का जुर्माना भी लगाया जा रहा है। जिसके चलते नगर परिषद ने सनौली क्षेत्र में 22.5 एमएलडी का एस्टीपी लगाने की तैयारी का जा रही थी। लेकिन उस पर कुछ लोगों द्वारा अदालती स्टे ले रखी है। जिसकी सुनवाई अदालत में चल रही है। समस्या यह है के यदि तीन महीने एस्टीपी की रिपेयर के चलते सीवरेज का दूषित पानी बिना ट्रीट किए घग्गर में गिरता रहा तो यह बड़ी समस्या है। जिक्र योग्य है के पहले शट-डाउन 30 जनवरी तक का लिया गया था जिसे अब बढ़कर 30 अप्रैल तक का कर दिया गया है जिसके चलते 3 महीने और शहर का सीवरेज का पानी बिना ट्वीट किया घगर में गिरता रहेगा।
हर महीने नगर कौंसिल को लग रहा है 15 लाख रुपए का जुर्माना
बलटाना व गाजीपुर क्षेत्र से निकलने वाली सुखना चो में पिछले चार वर्षो से लगातार प्रदूषित पानी गिराया जा रहा है। यह गंदा पानी लोगों के साथ साथ नगर परिषद द्वारा भी गिराया जा रहा है। जबकि इसके देख रेख करना नगर परिषद की खुद की है। उससे भी हैरान करने वाली बात यह है कि पंजाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड द्वारा सुखना चो को प्रदूषित करने के आरोप में हर महीने नगर परिषद को 5 लाख रूपये जुर्माना लगाया जा रहा है। इसके इलावा एस्टीपी ओवर फ्लो होने के चलते अलग से दस लाख रूपये हर महीने जुर्माना लगाया जा रहा है। यह जुर्माना 25 जून 2020 से लगाया जा रहा है जबकि दोनों जुर्माने को जोड़ा जाए तो 15 लाख रूपये हर महीने जुर्माना लग रहा है। जो पिछले चार वर्षो में करीब 7 करोड़ से अधिक की राशि बनती है। जो की बहुत बड़ी राशि है और लोगों द्वारा टेक्स के रूप में दिए जा रहे पैसे बिना किसी परवाह के बर्बाद किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि यदि यह जुर्माना अधिकारियों के जेब से जाता तो शायद यह नौबत नही आती। क्योंकि गाजीपुर क्षेत्र से निकल रही सीवरेज लाइन पेंचर कर सुखना चो में पानी गिराया जा रहा है। जिसकी शिकायत स्थानीय लोग कई बार कर चुके हैं और प्रदूषण विभाग भी इस मामले में कोई नोटिस दे चूका हैं लेकिन नगर परिषद की लापरवाही के कारण पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। जिस तरफ प्रदूषण कंट्रोल को ध्यान देते हुए सख्त कदम उठाने चाहिए।
प्रदूषण विभाग के अधिकारी नहीं दे रहे हैं कोई स्पष्ट जवाब
जीरकपुर शहर में खाली जमीन पर बड़ी-बड़ी सोसाइटियों द्वारा गिराए जा रहे सीवरेज के गंदे पानी संबंधी तथा फैल रहे प्रदूषण संबंधी पूछे जाने पर प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के अधिकारी कोई स्पष्ट जवाब देने से टालमटोल कर रहे हैं। एक महीना पहले मौके का दौरा करने आए प्रदूषण विभाग के अधिकारी द्वारा उच्च अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जानी थी, उस संबंधी पूछे जाने पर भी प्रदूषण विभाग के अधिकारी कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे रहे।
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