पंचकूला में बढ़ते छोटे अपराधों ने बढ़ाई चिंता, जिग वर्कर्स और रात्रि कर्मचारियों की सुरक्षा पर सवाल
एक ओर जहां पंचकूला पुलिस वर्ष 2026 के लिए अपराध नियंत्रण को लेकर क्राइम मीटिंग की डीपीआर तैयार करने में जुटी है, वहीं दूसरी ओर शहर में हो रही छोटी-छोटी आपराधिक घटनाएं व्यापारियों और आम समाज के लिए चिंता का कारण बनती जा रही हैं। कभी शांत और सुरक्षित माने जाने वाले पंचकूला में पिछले कुछ वर्षों के दौरान छोटे अपराधों की संख्या में धीरे-धीरे इजाफा देखने को मिला है। जानकारों का मानना है कि यदि इन घटनाओं पर समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया, तो आने वाले समय में यही छोटे अपराध एक बड़े अपराध तंत्र का रूप ले सकते हैं।
विशेष रूप से जिग वर्कर्स—जैसे स्विग्गी, जोमैटो से जुड़े डिलीवरी बॉय—और होटल व रेस्टोरेंट में देर रात तक काम करने वाले कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बताया जा रहा है कि रात के समय ड्यूटी खत्म कर घर लौटते वक्त कई कर्मचारियों के साथ छीना-झपटी और मारपीट की घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें से कुछ मामलों की शिकायत पुलिस तक पहुंची, लेकिन अधिकांश घटनाएं डर के कारण पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं हो पातीं। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें रोज इन्हीं रास्तों से आना-जाना होता है और शिकायत करने पर भविष्य में और परेशानी होने का डर बना रहता है।
जो मामले पुलिस तक पहुंचे हैं, उनमें भी अब तक ठोस कार्रवाई न होने से असंतोष बढ़ रहा है।
ताजा मामला 31 दिसंबर की देर शाम का है। सेक्टर-11 पंचकूला में एक मशहूर मिठाई की दुकान के पास चाय की दुकान लगाने वाले एक व्यक्ति से करीब रात 9 बजे कुछ युवकों ने पीछे से धक्का देकर 6,000 रुपये की नकदी लूट ली। आरोप है कि लुटेरे जाते समय दुकान से सिगरेट और बीड़ी भी उठा ले गए। इस घटना की शिकायत पुलिस को दी गई, लेकिन समाचार लिखे जाने तक आरोपी पुलिस की पकड़ से बाहर हैं।
इसी तरह, पिछले महीने 19 या 20 दिसंबर को सेक्टर-11 की ही एक प्रसिद्ध मिठाई दुकान के कर्मचारी के साथ सेक्टर-4 क्षेत्र में चाकू दिखाकर हमला किया गया। हमलावरों ने कर्मचारी को घायल करने के बाद उससे नकदी और मोबाइल फोन लूट लिया। यह मामला भी पुलिस तक पहुंचा, लेकिन यहां भी अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। हालांकि शिकायतकर्ता का दावा है कि उसने सोशल मीडिया के माध्यम से आरोपियों की पहचान कर ली है और उनकी तस्वीरें भी अखबार को उपलब्ध कराई गई हैं, लेकिन अखबार स्वतंत्र रूप से इन तस्वीरों की पुष्टि नहीं कर सकता। इसी कारण उन तस्वीरों को प्रकाशित नहीं किया जा रहा है।
इन लगातार हो रही घटनाओं से व्यापारी वर्ग में गहरा रोष है। व्यापारिक संगठनों ने पुलिस प्रशासन से रात्रिकालीन सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की मांग उठाई है। व्यापारी संगठनों ने डीसीपी सृष्टि गुप्ता और डीसीपी क्राइम मधुसूदन से आग्रह किया है कि देर रात के समय पीसीआर की संख्या बढ़ाई जाए और संवेदनशील इलाकों में नियमित गश्त सुनिश्चित की जाए, ताकि होटल और रेस्टोरेंट से आने-जाने वाले कर्मचारियों को सुरक्षित माहौल मिल सके।
व्यापारियों का कहना है कि मौजूदा हालात में उनके कर्मचारी भय के साये में काम कर रहे हैं। कई प्रतिष्ठान मजबूरी में अपने कर्मचारियों को घर छोड़ने के लिए वाहन उपलब्ध करवा रहे हैं, जिससे अतिरिक्त आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है। व्यापारियों ने सवाल उठाया कि जब वाहन कर्मचारियों को छोड़कर लौटता है, तब ड्राइवर अकेला होता है और उसके साथ भी किसी अप्रिय घटना की आशंका बनी रहती है।
कुल मिलाकर, पंचकूला में बढ़ते छोटे अपराध न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती बन रहे हैं, बल्कि शहर की उस छवि को भी नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिसे लंबे समय तक एक शांत और सुरक्षित शहर के रूप में जाना जाता था। अब देखना यह होगा कि पुलिस प्रशासन इन घटनाओं को कितनी गंभीरता से लेता है और जमीनी स्तर पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।





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