आने वाले चुनाव में कांग्रेस को उम्मीदवार मिलने भी मुश्किल
चुनावी राह पर बहुत कठिन है डगर कांग्रेस की
खरी खरी : भाजपा की जीत का यही ट्रेड रहा बरकरार तो
हरियाणा निकाय चुनाव में कांग्रेस का सफाया, गुटबाजी बनी हार की बड़ी वजह
चंडीगढ़ केशव माहेश्वरी
12 मार्च को हरियाणा निकाय चुनाव के नतीजे आने के बाद राजनीतिक गलियारों में यह कहा जाने लगा है कि अगर भाजपा की जीत का यही ट्रेंड रहा तो आने वाले समय में कांग्रेस को उम्मीदवार मिलने भी मुश्किल हो सकते हैं । उसकी वजह भी पूरी तरीके से साफ-साफ है क्योंकि वर्तमान में हरियाणा में कांग्रेस नेताओं में गुटबाजी चरम पर है ।
हरियाणा में कांग्रेस की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है। विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद अब शहरी निकाय चुनाव में भी पार्टी का पूरी तरह सफाया हो गया है। इससे साफ जाहिर होता है कि कांग्रेस अंदरूनी गुटबाजी से उबर नहीं पा रही। दूसरी ओर, भाजपा अपनी संगठनात्मक मजबूती और रणनीतिक बढ़त के कारण लगातार चुनाव दर चुनाव जीत का सिलसिला बनाए हुए है। कांग्रेस की कमजोर होती स्थिति को देखते हुए यह भी कहा जा रहा है कि आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में पार्टी को उम्मीदवार मिलना भी मुश्किल हो सकता है।
गुटबाजी के कारण कांग्रेस कमजोर
हरियाणा कांग्रेस लंबे समय से अंदरूनी कलह और गुटबाजी का शिकार रही है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा, कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव रणदीप सुरजेवाला, और वरिष्ठ नेता कैप्टन अजय यादव—यह सभी अलग-अलग धड़ों में बंटे नजर आते हैं। इन नेताओं के बीच आपसी मतभेद का नतीजा यह हुआ कि कांग्रेस पूरे चुनाव में बिखरी हुई दिखी।
चुनाव प्रचार के दौरान कांग्रेस के बड़े नेता अपने-अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में भी सक्रिय नजर नहीं आए। पार्टी के अधिकतर उम्मीदवारों को संगठन का कोई समर्थन नहीं मिला और उन्हें चुनाव मैदान में अकेले उतरना पड़ा। इसका सीधा असर कांग्रेस के प्रदर्शन पर पड़ा और पार्टी को करारी हार झेलनी पड़ी।
कांग्रेस के गढ़ भी नहीं बचा सके दिग्गज
हरियाणा के कई इलाके जो कभी कांग्रेस के गढ़ माने जाते थे, वहां भी भाजपा ने अपनी पकड़ मजबूत कर ली । कांग्रेस के प्रभावशाली नेताओं के क्षेत्रों में भी पार्टी को करारी शिकस्त मिली । इन नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि कांग्रेस अब अपने ही प्रभाव वाले इलाकों में पैर जमाने में नाकाम साबित हो रही है।
कांग्रेस की लगातार हार से पार्टी के अंदर नेतृत्व परिवर्तन और संगठनात्मक सुधार को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। हरियाणा कांग्रेस को एक मजबूत नेतृत्व की जरूरत है, लेकिन पार्टी में इसको लेकर कोई स्पष्टता नहीं दिख रही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हरियाणा में कांग्रेस का संगठन 11 साल से सही ढंग से काम नहीं कर रहा। पार्टी में ब्लॉक स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक संगठनात्मक ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता है, लेकिन इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। निकाय चुनावों में कई कांग्रेस उम्मीदवारों को पार्टी की ओर से कोई मदद नहीं मिली, जिससे वे पूरी तरह अकेले पड़ गए और भाजपा के सुनियोजित प्रचार अभियान के सामने टिक नहीं सके ।
कांग्रेस के लिए आगे की राह कठिन
हरियाणा निकाय चुनाव में कांग्रेस के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि पार्टी की आगे की रणनीति क्या होगी? लगातार चुनावी हार से कार्यकर्ताओं का मनोबल टूट रहा है, और यदि पार्टी जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाती, तो आने वाले विधानसभा और लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के लिए स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कांग्रेस ने जल्द ही अपनी गुटबाजी पर नियंत्रण नहीं पाया और संगठन को मजबूत नहीं किया, तो आगामी चुनावों में उसे उम्मीदवार ढूंढना भी मुश्किल हो जाएगा। भाजपा की मजबूत पकड़ और कांग्रेस की बिखरी हुई स्थिति को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि हरियाणा में कांग्रेस की वापसी फिलहाल बेहद मुश्किल नजर आ रही है।
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