क्या एक बार फिर 2022 की यादें हो जाएगी ताजा ? : मुंबई में BJP-शिंदे गुट में मेयर पद को लेकर खींचतान, शिवसेना (यूबीटी) ने लगाया ‘कैद’ का आरोप
बीएमसी चुनाव के बाद मुंबई की राजनीति में सियासी तापमान तेज हो गया है। भाजपा और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को स्पष्ट बहुमत मिलने के बावजूद मेयर पद और नगरसेवकों की रणनीति को लेकर आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं।
16 जनवरी को घोषित 227 सीटों के चुनावी नतीजों के बाद, 17 जनवरी को शिंदे गुट के 29 नगरसेवक बांद्रा स्थित ताज लैंड्स एंड होटल में पहुंचे। शुरुआती तौर पर इसे सामान्य बैठक माना गया, लेकिन शिवसेना (यूबीटी) ने दावा किया कि नगरसेवकों को कैद करके रखा गया है, ताकि भाजपा उन्हें तोड़ न सके।
शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा कि जिस तरह शिंदे पहले विधायकों को तोड़ चुके हैं, अब अपने नगरसेवकों को होटल में कैद रखा गया है। कांग्रेस ने भी इस पर आपत्ति जताई। प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा कि भाजपा बहुमत को और मजबूत करने के लिए नगरसेवकों को तोड़ना चाहती है, इसलिए शिंदे गुट ने अपने नगरसेवकों को होटल में रखा।
वहीं, शिंदे गुट ने सभी आरोपों को खारिज किया। शिवसेना प्रवक्ता कृष्णा हेगड़े ने कहा कि नगरसेवकों के लिए आयोजित यह दो-दिवसीय कार्यक्रम केवल प्रशिक्षण कार्यशाला है, जिसमें बीएमसी के नियम, प्रक्रियाएँ और जिम्मेदारियों के बारे में जानकारी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि सभी नगरसेवक पूरी तरह संपर्क योग्य हैं और किसी को जबरन रोका नहीं गया।
शिवसेना नेता शीतल म्हात्रे ने भी कहा कि यह प्रशिक्षण शिवसेना के नए और अनुभवी नगरसेवकों को बीएमसी संचालन की समझ देने के लिए रखा गया है। होटल में किसी प्रकार की राजनीतिक कैद या दबाव की बात निराधार है।
बीएमसी चुनाव के परिणामों के बाद यह घटना साफ कर रही है कि मुंबई की राजनीति में सत्ता निश्चित दिखाई दे रही है, लेकिन रणनीतिक हलचल और बयानबाजी अभी जारी रहेगी, खासकर मेयर पद के फैसले को लेकर।
मुंबई में शिंदे गुट पर संजय राउत का आरोप: ‘ताज होटल बना दी जेल’
बीएमसी चुनाव नतीजों के बाद शिवसेना के 29 नए कॉर्पोरेटर्स को ताज लैंड्स एंड होटल बुलाने पर शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि शिंदे गुट ने होटल को यरवदा और आर्थर रोड जेल जैसा बना दिया, जहां पार्षदों को रोककर रखा गया है।
राउत ने इसे अनुचित और नाइंसाफी बताया और कहा कि मुख्यमंत्री को तुरंत आदेश देना चाहिए कि होटल में बंद किए गए पार्षदों को छोड़ा जाए। उनका आरोप है कि यह कार्रवाई नए पार्षदों को तोड़ने और शिंदे गुट के पक्ष में करने के उद्देश्य से की गई।
सूत्रों का कहना है कि होटल में बुलाने का मकसद किसी भी तरह की खरीद-फरोख्त या दबाव के जरिए पार्षदों को अपने गुट में लाने की कोशिश रोकना है।
बीएमसी चुनाव में भाजपा-शिंदे गठबंधन ने बहुमत हासिल किया, लेकिन शिवसेना (यूबीटी) ने 71 सीटें जीतकर मराठी बहुल इलाकों में अपना दबदबा बनाए रखा।
मुंबई में बीएमसी जीत के बाद सियासी हलचल, 2022 की याद ताजा
महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों के नतीजे घोषित हो चुके हैं, लेकिन सबसे ज्यादा सियासी चर्चा मुंबई नगर निगम (बीएमसी) को लेकर है। भाजपा-शिंदे गठबंधन ने बहुमत हासिल किया है, लेकिन शिवसेना के शिंदे गुट ने अपने 29 नए निर्वाचित पार्षदों को ताज लैंड्स एंड होटल में बुलाकर रख दिया है, जिससे राजनीतिक हलचल बढ़ गई है।
राजनीतिक विश्लेषक 2022 की घटनाओं की याद दिला रहे हैं, जब एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे की सरकार से नाता तोड़कर अपने विधायकों को गुजरात होते हुए गुवाहाटी शिफ्ट किया था। उस समय मुंबई की सियासत पूरी तरह गरमा गई थी और सरकार को स्थिर रखना चुनौतीपूर्ण हो गया था।
अब सवाल उठता है कि क्या इस बार भी शिंदे गुट इसी रणनीति को दोहरा सकता है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि होटल में बुलाए गए पार्षदों को प्रशिक्षण देने का दावा किया जा रहा है, लेकिन विपक्षी दल इसे पार्षदों को रोकने और दबाव बनाने की कोशिश मान रहे हैं।
बीएमसी चुनाव में भाजपा-शिंदे गठबंधन ने 227 सीटों में बहुमत हासिल किया है, लेकिन शिंदे गुट के पार्षदों को सुरक्षित रखने और किसी भी गुटबाजी को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया माना जा रहा है। सियासी माहौल फिलहाल बेहद संवेदनशील है और आगामी दिनों में राजनीतिक बयानबाजी और रणनीतियां और तेज होने की संभावना है।





Leave a Reply
Want to join the discussion?Feel free to contribute!