पंचकूला मेयर सीट जनरल घोषित, सियासी सरगर्मियां तेज
सभी वर्गों के लिए खुला चुनावी मैदान, दावेदारों की बढ़ी धड़कनें
पंचकूला नगर निगम के महापौर पद की सीट को लेकर चल रही अटकलों पर आखिरकार विराम लग गया है। गुरुवार को आरक्षण ड्रॉ की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मेयर पद की सीट को सामान्य (जनरल) श्रेणी के लिए घोषित कर दिया गया। सीट के जनरल होते ही पंचकूला की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और सभी राजनीतिक दलों में संभावित उम्मीदवारों की गतिविधियां बढ़ गई हैं।
पिछले कई दिनों से शहर की राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोरों पर थी कि इस बार मेयर सीट महिला आरक्षित होगी या किसी अन्य आरक्षित वर्ग के लिए तय की जाएगी। लेकिन जैसे ही आरक्षण ड्रॉ में सीट जनरल निकली, वैसे ही यह साफ हो गया कि अब कोई भी योग्य उम्मीदवार इस पद के लिए चुनावी मैदान में उतर सकता है। इससे चुनावी मुकाबला और अधिक रोचक हो गया है।
दूसरी बार जनता सीधे चुनेगी मेयर
यह पंचकूला के राजनीतिक इतिहास में दूसरी बार होगा जब नगर निगम का महापौर सीधे जनता द्वारा चुना जाएगा। इससे पहले वर्ष 2020 में कुलभूषण गोयल जनता के सीधे वोटों से पंचकूला के पहले निर्वाचित मेयर बने थे। हालांकि उनसे पहले उपेंद्र कौर अहलूवालिया मेयर रह चुकी हैं, लेकिन उनका चयन पार्षदों के माध्यम से हुआ था।
सीधे चुनाव की प्रक्रिया होने के कारण इस बार जनता की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मेयर का सीधा चुनाव स्थानीय मुद्दों, विकास कार्यों और उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि को निर्णायक बनाएगा।
भाजपा-कांग्रेस सहित सभी दल सक्रिय
सीट जनरल घोषित होते ही सभी प्रमुख राजनीतिक दल हरकत में आ गए हैं। भारतीय जनता पार्टी में पूर्व मेयर कुलभूषण गोयल को एक बार फिर मजबूत दावेदार माना जा रहा है। वहीं कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और जननायक जनता पार्टी भी अपने-अपने स्तर पर उम्मीदवारों की तलाश और रणनीति बनाने में जुट गई हैं।
आने वाले कुछ दिनों में यह तस्वीर और स्पष्ट हो जाएगी कि किन-किन चेहरों पर पार्टियां दांव खेलने जा रही हैं। टिकट को लेकर अंदरूनी मंथन तेज हो चुका है और संभावित उम्मीदवार जनसंपर्क, बैठकों और सोशल मीडिया के जरिए अपनी दावेदारी मजबूत करने में लगे हैं।
चुनावी माहौल होगा दिलचस्प
वार्डों के आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होते ही पार्षद पद के दावेदार भी मैदान में उतर आए हैं। शहर में राजनीतिक चर्चाएं, बैठकों और रणनीतिक जोड़-तोड़ का दौर शुरू हो चुका है। साफ है कि इस बार पंचकूला नगर निगम का मेयर चुनाव सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक बड़े सियासी मुकाबले का रूप लेने जा रहा है।
आगामी दिनों में जैसे-जैसे उम्मीदवारों के नाम सामने आएंगे, पंचकूला की राजनीति में गर्माहट और तेज होती जाएगी।




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