कब आयेंगे अच्छे दिन पिंजौर कालका के ? अब तो ट्रिपल इंजन की सरकार है ?
पिंजौर–कालका में सड़कों की दुर्दशा जस की तस: गड्ढों में सड़क या सड़क में गड्ढे—पहचानना मुश्किल, आवाजाही बनी जोखिम भरी
हरियाणा की कालका विधानसभा जो की हिमाचल के सोलन जिले के परमाणु कस्बे से सीधे जुड़ती है । पंचकूला के साथ-साथ कालका पिंजौर के रहने वाले ज्यादातर लोगों को परमाणु का सफर रोजाना करना पड़ता है , क्योंकि परमाणु इंडस्ट्रियल एरिया है , और यहां पर हजारों फैक्ट्रियां हैं और इन फैक्ट्री में काम करने वाले लोग सफर करने के लिए कालका पिंजौर के रास्ते का ही इस्तेमाल करते हैं । पर समस्या तब खड़ी होती जब उनको यही नहीं समझ में आता कि वह सड़क पर चल रहे हैं या फिर गांव की सड़क पर चल रहे हैं । लोगों को कहना इससे अच्छी तो आज के दौर में गांव की सड़कें हो गई है ।
पिंजौर और कालका क्षेत्र की सड़कें आज जिस हाल में हैं, उन्हें देखकर स्थानीय लोग अक्सर तंज में कहते हैं— “सड़क में गड्ढे हैं या गड्ढों में सड़क, अब समझ नहीं आता।” यह स्थिति कोई एक-दो जगह की नहीं, बल्कि पूरे मार्ग की है। चंडीगढ़-शिमला हाईवे से पिंजौर की ओर मुड़ते ही सड़क की टूट-फूट और उखड़ी परत यात्रियों का स्वागत करती है और यह जर्जर मार्ग कालका के काली माता मंदिर तक लगातार परेशान करता रहता है।
हर मोड़ पर खतरा, हर किलोमीटर पर उखड़ा डामर
चंडीगढ़-शिमला हाईवे से पिंजौर तक का सड़क मार्ग हो, पिंजौर से बद्दी तक का रास्ता हो या फिर कालका शहर के भीतरी हिस्से—हर जगह सड़कों की हालत बेहद खराब है। उखड़ा डामर, जगह-जगह गहरे गड्ढे और धूल का गुबार हर दिन लोगों को मुश्किल में डाल रहा है।
सबसे ज्यादा परेशानी दोपहिया वाहन चालकों को उठानी पड़ रही है। लोगों का कहना है कि सड़क पर चलना रोजाना किसी जोखिम से कम नहीं, ऊपर से हवा में उड़ती धूल-मिट्टी तो मानो “फ्री का पाउडर” बनकर बाइक सवारों के नसीब में आ गई है। आंखों में जलन, गले में खराश और सांस लेने में परेशानी अब आम शिकायत बन चुकी है।

चुनाव के वादे हवा, एक साल बाद भी हाल बेहाल
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले साल चुनावों के दौरान सड़कें दुरुस्त करवाने का बड़ा वादा किया गया था। कहा गया था कि जैसे ही चुनाव जीतेंगे, क्षेत्र में सड़कें प्राथमिकता के साथ ठीक करवाई जाएंगी। लेकिन चुनावी वादे सिर्फ पोस्टरों पर ही रहे—जमीन पर नहीं उतरे।
अब एक साल बाद कुछ जगहों पर पैचवर्क शुरू हुआ है, लेकिन लोगों का कहना है कि यह काम सिर्फ दिखाने के लिए किया जा रहा है। बार-बार पानी लगने या थोड़ी सी बारिश के बाद यही पैचवर्क उखड़ जाता है और सड़क फिर पहले जैसी हो जाती है।
स्थानीय लोगों का साफ कहना है— “सड़क की हालत इतनी खराब है कि अब पैचवर्क नहीं, नई सड़क की जरूरत है।”
बीजेपी के सभी पहिये जुड़े, लेकिन विकास गायब
राजनीतिक रूप से यह क्षेत्र पूरी तरह भाजपा के नियंत्रण में है।
- कालका–पिंजौर क्षेत्र की विधायक शक्ति रानी शर्मा भाजपा से हैं।
- उनके बेटे कार्तिकेय शर्मा हरियाणा से राज्यसभा सांसद हैं।
- कालका नगर परिषद में भी चेयरमैन भाजपा का ही है।
- हरियाणा में भाजपा सरकार है।
- केंद्र में भी भाजपा की सरकार है।
स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि “जब विकास की गाड़ी के सारे पहियों के साथ-साथ स्टेपनी भी बीजेपी की ही हैं, तब भी सड़कें क्यों नहीं बन रहीं? समस्या किस कड़ी में अटकी है?”
पिछले कार्यकाल में भी यही हाल, तब जिम्मेदारी दूसरे पर
लोग बताते हैं कि इससे पहले जब प्रदीप चौधरी विधायक थे, तब भी सड़कें खराब थीं। उस समय चौधरी कहते थे कि वे काम करवाना चाहते हैं, प्रस्ताव भेजते हैं, लेकिन सरकार और नगर परिषद मंजूरी नहीं देते। अब जबकि सरकार, नगर परिषद और विधायक—सभी एक ही दल से हैं, फिर भी हालात जस के तस हैं। दरअसल प्रदीप चौधरी कांग्रेस से जीतकर आए थे ।
दुर्घटनाओं का बढ़ता खतरा, जनता में रोष
टूटी सड़कों के कारण दोपहिया वाहन अक्सर फिसलते हैं, कई लोग चोटिल भी हो चुके हैं। खराब सड़कें न सिर्फ यातायात को धीमा कर रही हैं, बल्कि यह रोजाना दुर्घटनाओं का कारण भी बन रही हैं। दुकानदारों और रोज़ाना यात्रा करने वालों का कहना है कि प्रशासन को सड़क निर्माण को तत्काल प्राथमिकता में लेना चाहिए।
लोगों का कहना है कि पिंजौर, कालका और पिंजौर-बद्दी मार्ग न सिर्फ स्थानीय जनता के लिए जरूरी हैं, बल्कि यह औद्योगिक और धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण रूट है। इतने अहम मार्ग को इस हालत में छोड़ना जनता के साथ अन्याय है।
जनता की मांग—पैचवर्क नहीं, नई सड़क चाहिए
लोगों का कहना है कि अब समय आ गया है कि सरकार और विभाग जमीनी हकीकत को समझकर ठोस कदम उठाएं। सिर्फ थोड़ा-थोड़ा पैच भरने से समस्या नहीं सुलझेगी। पूरी सड़क को दोबारा बनाने की जरूरत है, ताकि आने वाले सालों के लिए लोगों को राहत मिले।




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