छूटी हुई पाठशाला
– डॉ. प्रियंका सौरभ मिट्टी की उन पगडंडियों पर, जहाँ सुबह‑सुबह धूप भी संकोच से उतरती है, एक छोटी‑सी लड़की आज फिर घर की देहरी पर रुक गई। उसका नीला‑सा फीका पड़ चुका स्कूल‑फ्रॉक, जैसे हर रोज़ उससे पूछता हो—“चलें?” और चौखट पर खड़ी माँ की आँखें, खाली बर्तनों और अधूरे कामों की तरफ़ इशारा […]

