धर्म का स्वरूप: सेवा या स्वार्थ?
भारत को सदियों से धर्म, आस्था और आध्यात्म की भूमि माना जाता रहा है। यहाँ धर्म केवल पूजा-पाठ या कर्मकांड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जीवन के हर पक्ष को दिशा देने वाला तत्व रहा है। आस्था ने व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में संबल दिया, उसे नैतिकता और मानवता से जोड़े रखा। किंतु बदलते समय […]

