गैंगस्टर ने दुकान पर बरसाईं गोलियां, LIC ने रोका क्लेम! अब आयोग का आदेश—ब्याज समेत दो अतिरिक्त बीमा राशि
चंडीगढ़। गैंगस्टर की साजिश के तहत हुई हत्या को आधार बनाकर बीमा कंपनी परिवार का दुर्घटना मृत्यु लाभ रोक सकती है या नहीं? पंजाब राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने इस सवाल पर अहम फैसला सुनाते हुए भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) को मृतक की चार बीमा पॉलिसियों के तहत अतिरिक्त दुर्घटना लाभ देने का आदेश दिया है। आयोग ने कंपनी को 30 अप्रैल 2021 से छह प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ भुगतान करने का निर्देश भी दिया। फैसले से स्पष्ट हुआ कि हत्या का जानबूझकर किया जाना अपने आप में अतिरिक्त बीमा लाभ खारिज करने का पर्याप्त आधार नहीं है।
मामला मोगा के तजिंदर सिंह की हत्या से जुड़ा है। 14 जुलाई 2020 को वह अपनी दुकान पर बैठे थे, तभी अज्ञात हमलावरों ने उनकी हत्या कर दी। तजिंदर सिंह ने LIC की चार जीवन बीमा पॉलिसियां ले रखी थीं, जिनमें डबल एक्सीडेंट बेनिफिट का प्रावधान था। चारों पॉलिसियों की मूल बीमा राशि कुल 26.6 लाख रुपये थी। उनकी मौत के बाद LIC ने परिवार को सामान्य मृत्यु लाभ तो दे दिया, लेकिन अतिरिक्त दुर्घटना लाभ देने से इनकार कर दिया।
गैंगस्टर की पोस्ट बनी LIC की दलील, आयोग ने मांगे ठोस सबूत
LIC का तर्क था कि सोशल मीडिया पर उपलब्ध सामग्री और पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट से संकेत मिलता है कि हत्या गैंगस्टर सुखप्रीत सिंह उर्फ सुखा गिल लाम्मे ने इलाके में दहशत फैलाने के लिए करवाई थी। कंपनी के मुताबिक, हत्या पहले से योजनाबद्ध थी, इसलिए अतिरिक्त दुर्घटना लाभ देय नहीं था।
मोगा जिला उपभोक्ता आयोग ने नवंबर 2022 में LIC की दलील स्वीकार करते हुए परिवार की शिकायत खारिज कर दी थी। इसके बाद परिवार ने राज्य उपभोक्ता आयोग में अपील की।
‘हत्या की साजिश अलग, बीमा की पात्रता अलग’
न्यायिक सदस्य एचपीएस महाल और सदस्य किरण सिबल की पीठ ने मामले की समीक्षा करते हुए पाया कि LIC यह साबित नहीं कर सकी कि तजिंदर सिंह स्वयं किसी ऐसी गतिविधि में शामिल थे, जिसके कारण उनकी हत्या हुई। आयोग के अनुसार, गैंगस्टर की कथित सोशल मीडिया पोस्ट में विवाद का दावा किया गया था, लेकिन इसकी पुष्टि न तो एफआईआर से हुई और न ही पुलिस जांच रिपोर्ट से।
आयोग ने LIC के वर्ष 2007 के सर्कुलर का भी उल्लेख किया। इसके मुताबिक, हत्या के मामलों में अतिरिक्त दुर्घटना लाभ रोका जाना जरूरी नहीं है, बशर्ते पुलिस रिकॉर्ड से यह संकेत न मिले कि मृतक ने हत्या के लिए उकसाया था या बीमा दावा करने वाले परिवार की इसमें मिलीभगत थी। कंपनी संबंधित पॉलिसियों की ऐसी कोई स्पष्ट शर्त भी पेश नहीं कर सकी, जिसके आधार पर अतिरिक्त लाभ से इनकार उचित ठहराया जा सके।
जिला आयोग का आदेश रद्द, ब्याज समेत मिलेगा पैसा
राज्य आयोग ने जिला उपभोक्ता आयोग का पुराना आदेश रद्द करते हुए LIC को चारों पॉलिसियों के तहत अतिरिक्त दुर्घटना मृत्यु लाभ देने का निर्देश दिया। इसके साथ ही 30 अप्रैल 2021 से छह प्रतिशत सालाना ब्याज भी देना होगा।
इस फैसले का अर्थ यह नहीं है कि हत्या के हर मामले में अतिरिक्त बीमा राशि स्वतः मिल जाएगी। पॉलिसी की शर्तें, पुलिस रिकॉर्ड और मामले के तथ्य निर्णायक होंगे। आयोग ने स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी केवल हत्या को सुनियोजित अपराध बताकर दावा खारिज नहीं कर सकती; उसे अपने फैसले के समर्थन में ठोस आधार और लागू पॉलिसी शर्तें भी प्रस्तुत करनी होंगी।




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