RERA आदेश की अनदेखी पड़ी भारी: अंसल प्रॉपर्टीज की वर्किंग डायरेक्टर को 3 माह की सिविल जेल
HRERA पंचकूला का सख्त रुख, बार-बार अवसर के बावजूद पेशी और निर्देशों का पालन नहीं करने पर कार्रवाई
हरियाणा रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (HRERA), पंचकूला ने रेरा आदेश की कथित अवहेलना के मामले में अंसल प्रॉपर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की वर्किंग डायरेक्टर जगत चंद्रा को तीन माह की सिविल इम्प्रिजनमेंट की सजा सुनाई है। यह आदेश एडजुडिकेटिंग ऑफिसर मेजर फालित शर्मा (सेवानिवृत्त AD&SJ) ने 17 अगस्त को जारी किया। पर उसकी कॉपी शनिवार देर रात सामने आई ।
मामला एग्जीक्यूशन नंबर 2972/2022 से संबंधित है, जिसमें डिक्री होल्डर सोम प्रकाश अग्रवाल और अंसल प्रॉपर्टीज के बीच चल रही कार्यवाही में अथॉरिटी के निर्देशों के अनुपालन का मुद्दा उठा। विवाद की जड़ 7 अप्रैल 2026 को जारी उस आदेश से जुड़ी है, जिसके तहत कंपनी की ओर से आवश्यक जानकारी/कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे।
तीन अवसरों के बावजूद नहीं हुई पेशी
अथॉरिटी के अनुसार जगत चंद्रा को शो-कॉज नोटिस का जवाब देने के लिए व्यक्तिगत रूप से पेश होना था, लेकिन 17 अगस्त की सुनवाई में वह न तो खुद पहुंचीं और न ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए उपस्थित हुईं। उनके वकील ने स्वास्थ्य संबंधी कारण बताते हुए व्यक्तिगत पेशी से छूट और अतिरिक्त समय की मांग की।
डिक्री होल्डर की ओर से इस मांग का विरोध किया गया। अधिवक्ता ने दलील दी कि वर्ष 2022 से चल रही एग्जीक्यूशन प्रक्रिया में लगातार देरी हो रही है और आदेशों के अनुपालन के लिए प्रभावी कार्रवाई जरूरी है। अथॉरिटी ने भी रिकॉर्ड में माना कि संबंधित पक्ष को पहले पर्याप्त अवसर दिए जा चुके थे और पिछली सुनवाई में अंतिम मौका दिया गया था।
महिला की गिरफ्तारी पर सामान्य सुरक्षा भी लागू नहीं मानी
HRERA ने स्पष्ट किया कि मौजूदा कार्रवाई सामान्य तौर पर किसी मनी डिक्री की वसूली के लिए नहीं, बल्कि एग्जीक्यूटिंग अथॉरिटी के आदेश की अवहेलना के लिए CPC के Order XXI Rule 41(3) के तहत की जा रही है। इसी आधार पर महिला की गिरफ्तारी से जुड़ी CPC की धारा 56 वाली सामान्य सुरक्षा को इस मामले में लागू नहीं माना गया।
अथॉरिटी ने RERA Act की धारा 40 और HRERA Rules के तहत सिविल कोर्ट जैसी शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सजा का आदेश दिया है।
30 अगस्त तक जमा होगी सब्सिस्टेंस राशि
आदेश के मुताबिक डिक्री होल्डर को 30 अगस्त 2026 तक प्रतिदिन 100 रुपये या लागू हरियाणा प्रिजन रूल्स के अनुसार सब्सिस्टेंस अलाउंस जमा करना होगा। इसके बाद अथॉरिटी को सूचना दिए जाने पर गिरफ्तारी वारंट जारी किया जाएगा। वारंट की तामील चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट, बेंगलुरु के माध्यम से कराने के निर्देश दिए गए हैं।
गिरफ्तारी की तारीख से तीन माह की सिविल इम्प्रिजनमेंट अवधि शुरू होगी। मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को निर्धारित है। HRERA के इस आदेश को रियल एस्टेट कंपनियों के लिए स्पष्ट संदेश माना जा रहा है कि नियामकीय और एग्जीक्यूशन आदेशों की लगातार अनदेखी महंगी पड़ सकती है।



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