सोना-चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट: चांदी ₹6,543 टूटी, सोना ₹1,907 सस्ता; निवेशकों के लिए क्या हैं संकेत?
नई दिल्ली, 28 जुलाई। घरेलू सर्राफा बाजार में सप्ताह की शुरुआत गिरावट के साथ हुई। मंगलवार को सोने और चांदी दोनों की कीमतों में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, एक किलोग्राम चांदी की कीमत में ₹6,543 की गिरावट आई, जिसके बाद इसका भाव घटकर लगभग ₹2.18 लाख प्रति किलोग्राम रह गया। वहीं, 24 कैरेट सोने के 10 ग्राम का भाव ₹1,907 घटकर करीब ₹1.43 लाख पर पहुंच गया।
हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार और घरेलू मांग में उतार-चढ़ाव के कारण कीमती धातुओं की कीमतों में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। मंगलवार की गिरावट ने उन निवेशकों का ध्यान भी अपनी ओर आकर्षित किया है, जो लंबे समय से सोना और चांदी में निवेश की रणनीति बना रहे हैं।
इस साल सोने ने दिया सकारात्मक रिटर्न
हालांकि मंगलवार को सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिली, लेकिन पूरे वर्ष 2026 की बात करें तो सोने ने अब तक निवेशकों को अच्छा रिटर्न दिया है। वर्ष 2025 के अंतिम कारोबारी दिन 31 दिसंबर को 24 कैरेट सोने का भाव 10 ग्राम के लिए लगभग ₹1.33 लाख था, जो अब बढ़कर करीब ₹1.43 लाख के स्तर पर पहुंच चुका है। यानी इस वर्ष अब तक सोने की कीमत में लगभग ₹10 हजार की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की खरीद और सुरक्षित निवेश की मांग ने इस वर्ष सोने की कीमतों को मजबूती प्रदान की है।
चांदी इस साल हुई करीब ₹12 हजार सस्ती
सोने के विपरीत चांदी का प्रदर्शन इस वर्ष कमजोर रहा है। 31 दिसंबर 2025 को चांदी का भाव लगभग ₹2.30 लाख प्रति किलोग्राम था, जो अब घटकर करीब ₹2.18 लाख प्रति किलोग्राम पर आ गया है। इस प्रकार वर्ष 2026 में अब तक चांदी की कीमत में लगभग ₹12 हजार प्रति किलोग्राम की गिरावट दर्ज की जा चुकी है।
विश्लेषकों के अनुसार, औद्योगिक मांग में उतार-चढ़ाव और वैश्विक बाजार में कीमतों के दबाव का असर चांदी पर अधिक देखने को मिला है।

इस साल दोनों धातुओं ने बनाया था रिकॉर्ड स्तर
हालांकि मौजूदा समय में कीमतें अपने उच्चतम स्तर से काफी नीचे हैं, लेकिन इसी वर्ष दोनों कीमती धातुओं ने ऐतिहासिक रिकॉर्ड भी बनाए थे। 29 जनवरी 2026 को सोने ने करीब ₹1.76 लाख प्रति 10 ग्राम का ऑलटाइम हाई दर्ज किया था। वहीं, चांदी ने भी लगभग ₹3.86 लाख प्रति किलोग्राम तक पहुंचकर नया रिकॉर्ड बनाया था।
इसके बाद मुनाफावसूली, वैश्विक बाजार में बदलाव और निवेशकों की रणनीति में परिवर्तन के चलते दोनों धातुओं की कीमतों में लगातार सुधार देखने को मिला।
निवेशकों के लिए क्या है सलाह?
कमोडिटी बाजार के जानकार अजय केडिया का कहना है कि सोना और चांदी अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से काफी नीचे कारोबार कर रहे हैं। ऐसे में लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह अवसर हो सकता है। हालांकि उन्होंने निवेशकों को एकमुश्त बड़ी राशि लगाने के बजाय चरणबद्ध तरीके से निवेश करने की सलाह दी है।
उनके अनुसार, यदि वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं और सुरक्षित निवेश की मांग बनी रहती है, तो वर्ष 2026 के अंत तक सोना करीब ₹1.60 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी लगभग ₹2.80 लाख प्रति किलोग्राम के स्तर तक पहुंच सकती है।
बाजार पर किन कारकों का रहता है असर?
सोना और चांदी की कीमतें केवल घरेलू मांग से तय नहीं होतीं। इन पर कई वैश्विक और आर्थिक कारकों का प्रभाव पड़ता है, जिनमें अमेरिकी डॉलर की चाल, अंतरराष्ट्रीय बुलियन बाजार, ब्याज दरों में बदलाव, केंद्रीय बैंकों की नीतियां, भू-राजनीतिक तनाव और निवेशकों की जोखिम लेने की क्षमता प्रमुख हैं। इन कारणों से कीमतों में रोजाना उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है।
आगे क्या देखें?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेतकों और अंतरराष्ट्रीय बाजार की गतिविधियों पर निवेशकों की नजर बनी रहेगी। यदि विदेशी बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में मजबूती लौटती है, तो घरेलू बाजार में भी इनके भाव दोबारा बढ़ सकते हैं। फिलहाल कीमतों में आई हालिया गिरावट उन लोगों के लिए अवसर मानी जा रही है, जो लंबे समय के निवेश के उद्देश्य से सर्राफा बाजार में प्रवेश करना चाहते हैं।
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