योग दिवस पर नेताओं का ‘कुर्सी योग’, सत्ता साधना में जुटे दिखे सियासत के महारथी
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर रविवार को देशभर में नेताओं ने बढ़-चढ़कर योग किया। मंच अलग-अलग थे, आसन भी अलग-अलग थे, लेकिन राजनीतिक गलियारों में चर्चा इस बात की रही कि अधिकांश नेताओं का ध्यान योग से अधिक अपनी-अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और सत्ता समीकरणों पर केंद्रित रहा होगा।
पंजाब में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन ने जालंधर में योग किया। राजनीतिक जानकारों की मानें तो उनका योगासन आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा की स्थिति मजबूत करने और पंजाब में सत्ता का रास्ता तलाशने की दिशा में रहा होगा। वहीं सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के नेता भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल का योग संभवतः मौजूदा सत्ता को बरकरार रखने की कामना से जुड़ा रहा होगा।
पड़ोसी राज्य हिमाचल प्रदेश में भी अगले वर्ष चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू का योगासन अपनी सरकार और कुर्सी को सुरक्षित रखने की दिशा में माना जा सकता है। दूसरी ओर भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का ध्यान सत्ता परिवर्तन की संभावनाओं पर केंद्रित रहा होगा।
अगर बात उत्तर प्रदेश की करें तो यहां भी राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का योग 2027 में भाजपा सरकार की वापसी की कामना से प्रेरित माना जा सकता है, जबकि समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने शायद सत्ता परिवर्तन की दिशा में ‘सत्ता पलट योग’ का अभ्यास किया हो।
हरियाणा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हालिया चुनावी सफलताओं के बाद जनता के प्रति आभार प्रकट करने के भाव से योग किया होगा। चूंकि विधानसभा चुनाव अभी दूर हैं, इसलिए फिलहाल उनके लिए ‘धन्यवाद योग’ ही सबसे उपयुक्त आसन माना जा सकता है।
इस बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकाता में योग किया। राजनीतिक विश्लेषकों के व्यंग्यात्मक दृष्टिकोण से देखें तो उनका योगासन पश्चिम बंगाल में भाजपा के बढ़ते जनाधार को और मजबूत करने की दिशा में एक प्रतीकात्मक संदेश माना जा सकता है।
दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के योग को लेकर भी राजनीतिक हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं रहीं। विरोधियों की नजर में उनका सबसे प्रभावी आसन शायद संगठन विस्तार और राजनीतिक समीकरणों को साधने वाला योग रहा होगा।
कुल मिलाकर योग दिवस पर नेताओं ने भले ही अलग-अलग आसन किए हों, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा खूब रही कि अधिकांश नेताओं के मन, मस्तिष्क और सपनों में योग से ज्यादा सत्ता, संगठन और चुनावी रणनीतियां ही घूम रही होंगी। ऐसे में कहा जा सकता है कि इस बार का सबसे लोकप्रिय आसन शायद ‘कुर्सी योग’ ही रहा।


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