एक दिन की गिरावट के बाद रॉकेट पर सवार सोना और चांदी
रुपया डॉलर के मुकाबले 92 के करीब, विदेशी निवेशकों की निकासी बढ़ा रही दबाव
शेयर बाजार धड़ाम , 6 लाख करोड़ डूबे !
शुक्रवार को अंतिम कारोबारी दिवस पर भारतीय रुपया 1 डॉलर के मुकाबले 91.99 के न्यूनतम स्तर पर पहुँच गया , जो इस साल का अब तक का सबसे कमजोर स्तर माना है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार बिकवाली और वैश्विक व्यापारिक तनाव को इसका मुख्य कारण बताया जा रहा है। जनवरी 2026 के पहले 22 दिनों में ही एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार से लगभग ₹36,500 करोड़ की निकासी की है।
रुपए के गिरने के तीन बड़े कारण
विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिकी डॉलर की मजबूती में तीन प्रमुख कारक शामिल हैं:
- अमेरिका में मजबूत अर्थव्यवस्था और उच्च ब्याज दरें,
- अमेरिकी राष्ट्रपति के व्यापारिक फैसलों और वैश्विक तनाव से पैदा हुई अनिश्चितता,
- तथा भारत से विदेशी निवेशकों की लगातार पैसा बाहर निकालना। इससे डॉलर की मांग बढ़ी है और रुपये पर दबाव बना है।
RBI हुआ सक्रिय पर ….
भारतीय रिजर्व बैंक ने हाल में आक्रामक हस्तक्षेप करते हुए रुपये को संभालने के लिए डॉलर बेचे हैं, लेकिन डॉलर की मजबूत मांग के चलते गिरावट को पूरी तरह रोक नहीं पाया है।
CR फॉरेक्स एडवाइजर्स के एमडी अमित पाबारी का कहना है कि रुपये को 92 के स्तर पर मजबूत प्रतिरोध का सामना करना पड़ेगा, और अगर वैश्विक तनाव कम होता है तो रुपये में 90.50-90.70 के स्तर तक सुधार संभव है।
रुपए में यह गिरावट आम लोगों और व्यवसायों पर भी असर डाल रही है। इम्पोर्ट महंगा हो गया है, विदेश यात्रा और शिक्षा खर्च बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पूंजी का बाहर जाना रुपये के लिए अब भी सबसे बड़ी कमजोरी बना हुआ है।
शेयर बाजार में भारी गिरावट, निवेशकों के 6 लाख करोड़ रुपये डूबे
शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में अचानक तेज गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स 700 अंकों से अधिक लुढ़ककर 81,617.90 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 25,066.10 तक फिसल गया। इस गिरावट से निवेशकों की करीब 6 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति डूब गई। विदेशी निवेशकों (FIIs) की लगातार बिकवाली और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी को बाजार की इस स्थिति के मुख्य कारण के रूप में देखा जा रहा है।
सुबह बाजार ने 82,335.94 के स्तर से तेजी के साथ शुरुआत की और 82,516.27 तक उछाल भी देखा गया। लेकिन दिन के मध्य में मुनाफावसूली (Profit Booking) के चलते यह बढ़त तेजी से गायब हो गई। बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 5.7 लाख करोड़ रुपये घटकर 452.69 लाख करोड़ रुपये रह गया।
विशेषज्ञों का कहना है कि जनवरी के पहले 13 सत्रों में विदेशी निवेशकों ने लगातार अपने शेयर बेचकर कुल ₹36,500 करोड़ की निकासी की है। जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार ने कहा कि निवेशकों की नजर अब 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट और तिमाही नतीजों (Corporate Earnings) पर है। यदि कंपनियों के आय में वृद्धि दिखाई देती है और बजट में अनुकूल घोषणाएं होती हैं, तो विदेशी निवेशक वापस लौट सकते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल बाजार में शॉर्ट पोजीशन अधिक हैं और छोटे उछाल पर भी विदेशी निवेशक बिकवाली कर रहे हैं, जिससे शेयर बाजार की स्थिति अस्थिर बनी हुई है।
एक दिन की गिरावट के बाद सोना-चांदी ने फिर पकड़ी रॉकेट की रफ्तार
शेयर बाजार की उतार-चढ़ाव भरी उठापटक के बीच सोना और चांदी ने जोरदार वापसी की है। 23 जनवरी को गोल्ड और सिल्वर के एक्सचेंज ट्रेडेड फंड्स (ETF) में तेज रिकवरी देखी गई, जिससे निवेशकों का नुकसान कम हो गया।
बीते गुरुवार को शेयर बाजार में हल्की सुधार के बावजूद सोने और चांदी के भाव नीचे चले गए थे। चांदी की ETF में तो लगभग 20% तक गिरावट दर्ज की गई थी। लेकिन शुक्रवार को स्थिति पूरी तरह बदल गई। सोना और चांदी ने तेज उछाल लिया और गुरुवार के नुकसान की भरपाई कर ली। प्रीशियस मेटल्स ने इस दौरान नए ऑल-टाइम हाई स्तर भी छुए।
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल सोने में निवेश बेहतर विकल्प बना हुआ है, जबकि चांदी में उतार-चढ़ाव अधिक रहने की संभावना है। ETF अभी भी अपने 52 हफ्ते के उच्च स्तर से थोड़े नीचे ट्रेड कर रहे हैं, जो निवेशकों की सतर्कता बनाए रखता है।
कमोडिटी एक्सपर्ट्स ने निवेशकों को चेतावनी दी है कि शेयर बाजार में जोखिम अभी भी बरकरार हैं, ऐसे में प्रीशियस मेटल्स में निवेश करते समय सतर्क रहना जरूरी है।





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