महंगाई की किस्त के लिए जेब को कर लीजिए तैयार क्योंकि रुपया अब तक के सबसे न्यूनतम स्तर पर , तो सोने और चांदी ने लगा रखी है आग
लगातार तीसरा दिन शेयर बाजार गिरावट की ओर , निवेशकों के 14 लाख करोड रुपए डूबे
रुपए गिरने को लेकर पीएम मोदी का पुराना वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
जब-जब रुपया गिरता है तब तब महंगाई हमारी और आपकी पॉकेट की तरफ सुरसा की मुंह की तरह बढ़ती हुई आती है । और कुछ ऐसा ही हाल अगले कुछ दिनों या अगले कुछ महीनो में हो सकता है , क्योंकि रुपया डॉलर के मुकाबले में अब तक के अपने सबसे न्यूनतम स्तर पर आ गया है । अगर सरकार ने जल्दी ही कोई दखलंदाजी न दी तो अनुमान लगाया जा रहा है कि यह 92 से 93 रुपए के बीच में इसी हफ्ते पहुंच सकता है।
बुधवार को बाजार बंद होने के समय भारतीय रुपये ने डॉलर के मुकाबले 76 पैसे गिरकर 91.73 पर बंद होकर नया रिकॉर्ड बनाया है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली और वैश्विक व्यापारिक तनाव के चलते रुपया दबाव में है। पिछले साल दिसंबर में पहली बार रुपये ने 90 का स्तर पार किया था, और अब महज 21 दिनों में यह 91 के करीब पहुंच गया है।
मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नई टैरिफ नीतियां और वैश्विक तनाव ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश की ओर मोड़ा है, जिससे डॉलर और गोल्ड की मांग बढ़ी है। और इसी के असर से सोने और चांदी के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गए हैं।
इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, सोना बुधवार को अब तक की सबसे उच्चतम स्तर 1,55,204 रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया, जो कल 1,47,409 रुपए था। यानी केवल 21 दिनों में सोने की कीमत 21,744 रुपए बढ़ चुकी है।
वहीं बुधवार को ही 1 किलो चांदी की कीमत 3,20,075 रुपए हो गई है, जो कल 3,09,345 रुपए थी। चांदी इस साल केवल 21 दिनों में 90,825 रुपए महंगी हुई है।
सोने और चांदी के बढ़ते दाम और रुपए के गिरते स्तर को लेकर क्या कहते हैं विशेषज्ञ
- वैश्विक तनाव और ट्रेड वॉर: ग्रीनलैंड विवाद और अमेरिकी टैरिफ की धमकियों से बाजार अस्थिर, निवेशक सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर।
- रुपये की कमजोरी: डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरावट से सोने की लैंडिंग कॉस्ट बढ़ी
- घरेलू कीमतें ₹1.5 लाख पार
- सेंट्रल बैंकों की खरीदारी:
- विश्व भर के केंद्रीय बैंक सोने का स्टॉक बढ़ा रहे हैं, जिससे सप्लाई कम और कीमतें बढ़ी।
भविष्य का अनुमान: रिसर्च हेड डॉ. रेनिशा चैनानी के अनुसार, अगर वैश्विक टैरिफ और मध्य पूर्व में तनाव जारी रहा, तो सोना इस साल 1,90,000 रुपए प्रति 10 ग्राम तक और चांदी 4 लाख रुपए प्रति किलो तक पहुंच सकती है।
क्यों गिर रहा है बाजार
ट्रंप की ग्रीनलैंड की धमकियां– अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड पर कब्ज़ा करने और यूरोपीय संघ के साथ दोबारा व्यापार युद्ध शुरू करने की धमकियों के बीच बढ़ते तनाव के कारण एशियाई बाज़ारों में लगातार तीसरे दिन गिरावट देखी गई. इन बयानों से अमेरिकी निवेश से विदेशियों के पैसे निकालने का डर फिर से बढ़ गया है, जिसे आमतौर पर सेल अमेरिका ट्रेड कहा जाता है. ऐसा पिछली बार अप्रैल में देखा गया था, जब लिबरेशन डे टैरिफ की घोषणाओं के बाद वॉल स्ट्रीट एक ही दिन में 2% से ज्यादा गिर गया था और अमेरिकी डॉलर में एक महीने से अधिक समय की सबसे बड़ी गिरावट आई थी. इस वैश्विक गिरावट के कारण निवेशक सुरक्षित विकल्पों की ओर भागे, जिससे सोने और चांदी के दाम रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए. ट्रंप अपने रुख पर कायम रहे और उन्होंने साफ कहा कि ग्रीनलैंड पर नियंत्रण पाने के अपने इरादे से पीछे हटने का सवाल ही नहीं है. उन्होंने बल प्रयोग की संभावना को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया. यूरोप के खिलाफ नए टैरिफ लगाने की चेतावनियों ने एक नए वैश्विक व्यापार युद्ध की आशंका बढ़ा दी है. इसी बीच, यूरोपीय संघ गुरुवार को ब्रसेल्स में एक आपात बैठक करने जा रहा है, जबकि निवेशक बुधवार को दावोस में विश्व आर्थिक मंच में ट्रंप के भाषण का इंतजार कर रहे हैं ।
कमजोर घरेलू कमाई- कंपनियों के नतीजों के सीज़न से भी बाज़ार को ज्यादा राहत नहीं मिली. रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और आईसीआईसीआई बैंक जैसी बड़ी कंपनियों के कमजोर नतीजों ने निवेशकों का भरोसा और कमजोर किया. इससे यह चिंता बढ़ी कि शेयरों की ऊंची कीमतें कंपनियों की असली मजबूती से आगे निकल गई हैं. आईटी इंडेक्स 1% गिरा और यह सबसे ज्यादा नुकसान झेलने वाले सेक्टरों में शामिल रहा. परसिस्टेंट सिस्टम्स का तिमाही मुनाफा बढ़ने के बावजूद इसके शेयर 3.5% गिर गए, क्योंकि कई ब्रोकरेज हाउस ने आगे सीमित बढ़त की बात कही और ऊंची कीमतों को वजह बताया. कमजोर नतीजों और सतर्क भविष्य के अनुमान के कारण निवेशक अब शेयर चुनने में ज्यादा सावधानी बरत रहे हैं, जिससे पूरे बाज़ार पर दबाव बना हुआ है.
रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर पर- भारतीय रुपया बुधवार को अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया, जिससे पहले से दबाव में चल रहे शेयर निवेशकों की मुश्किलें और बढ़ गईं. वैश्विक स्तर पर जोखिम से बचने की सोच के कारण रुपये पर दबाव बना रहा. डॉलर के मुकाबले रुपया दिसंबर के बीच में बने अपने पुराने रिकॉर्ड निचले स्तर 91.0750 से नीचे फिसल गया और आखिरी बार करीब 91.73 पर कारोबार करता दिखा. इस गिरावट के पीछे ग्रीनलैंड विवाद, लगातार विदेशी पूंजी का निकलना और अमेरिका-भारत व्यापार समझौते को लेकर अनिश्चितता जैसे कारण रहे. इस महीने अब तक रुपया करीब 1.5% टूट चुका है, जो 2025 में आई लगभग 5% की गिरावट के बाद और कमजोरी को दिखाता है. इससे आयात महंगा होने और विदेशी निवेशकों के भरोसे को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं. भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी मौजूदा नीति पर ही टिके रहते हुए बाज़ार में कभी-कभी दखल दिया, ताकि बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव न हो, लेकिन उसने किसी खास स्तर पर रुपये को थामने की कोशिश नहीं की.
विदेशी निवेशक कर रहे हैं बिकवाली– विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली से बाज़ार का भरोसा और कमजोर हुआ है. FIIs ने लगातार ग्यारहवें दिन भी शुद्ध बिकवाली जारी रखी. मंगलवार, 20 जनवरी को विदेशी निवेशकों ने करीब 2,938 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए, जो बढ़ते वैश्विक व्यापार तनाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के बीच उनकी सतर्कता को दिखाता है. हालांकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने कुछ हद तक संतुलन बनाने की कोशिश की, लेकिन वह बाज़ार की गिरावट को रोकने के लिए पर्याप्त नहीं रही. उसी दिन DIIs ने लगभग 3,666 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे, जिससे थोड़ा सहारा मिला, लेकिन विदेशी निवेशकों का पैसा निकलना अब भी बाज़ार की दिशा तय करने वाला सबसे बड़ा कारण बना हुआ है.
लगातार तीसरा दिन जब गिरे शेयर बाजार
बुधवार लगातार तीसरा दिन रहा जब शेयर बाजार में गिरावट का दौर जारी रहा । 3 दिन में शेयर बाजार का इंडेक्स लगभग 2500 पॉइंट नीचे गिर चुका है और निवेशकों को लगभग 14 लाख करोड रुपए की चपत लग चुकी है । सिर्फ अगर मुकेश अंबानी की रिलायंस की बात किया तो मुकेश अंबानी की रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर मार्केट में पिछले 5 सालों के बाद सबसे निचले स्तर पर बंद हुए । एक अनुमान के अनुसार अंबानी ने तीन हफ्ते में 2.66 लाख करोड रुपए गंवा दिए हैं ।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा पीएम मोदी का पुराना वीडियो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 2014 से पहले रुपए की गिरने को लेकर दिया गया बयान सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा है । तब वर्तमान प्रधानमंत्री गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे , और प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह थे । तभी जनसभा में तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि रुपया इस देश का गिरता है जिस देश का प्रधानमंत्री गिरा होता है ।
अब रुपए के अपने न्यूनतम स्तर पर आने के बाद सोशल मीडिया पर यह वीडियो वायरल हो रहा है।





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