पंचकूला नगर निगम का बजट 2025 में पहुँचेगा 300 करोड़, लेकिन क्या बदलेगी शहर की तस्वीर?
पंचकूला नगर निगम ने वित्तीय वर्ष 2025 के लिए 300 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया है। हर वर्ष की तरह इस बार भी बजट में नगर के विकास और नागरिक सुविधाओं के विस्तार का दावा किया गया है। लेकिन विगत वर्षों की स्थिति को देखते हुए नागरिकों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या यह बजट केवल कागजी दस्तावेजों तक ही सीमित रहेगा, या वास्तव में शहर के हालात सुधारने के लिए उपयोग किया जाएगा?
संवाददाता/ललित
नगर निगम मेयर कुलभूषण गोयल ने हाउस मीटिंग में 25 नए एजेंडा प्रस्तुत किए, जिनमें शहर की बुनियादी सुविधाओं को सुधारने का दावा किया गया है। हालांकि, पिछली बार के बजट में शामिल कई प्रावधानों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
शहर की बदहाल स्थिति
1. सार्वजनिक शौचालयों की दुर्दशा:
शहर में स्वच्छता अभियान चलाए जाने के बावजूद सार्वजनिक शौचालयों की हालत दयनीय बनी हुई है। कई शौचालयों में सफाई की व्यवस्था न के बराबर है, फर्श टूटे पड़े हैं और टाइलें काली हो चुकी हैं। वॉश बेसिन की स्थिति भी खराब है, जिससे स्वच्छता अभियान की जमीनी हकीकत उजागर होती है।
2. खुले नालों से जान का खतरा:
पिछले वर्ष 3 सितंबर को खुले नाले में गिरने से तीन साल की बच्ची की दर्दनाक मौत हो गई थी। इसके बावजूद कई जगहों पर नाले अब भी बिना ढक्कन के खुले पड़े हैं, जिससे लोगों की सुरक्षा खतरे में है। प्रशासन की ओर से केवल हादसों के बाद संबंधित नालों को ढकने की कार्रवाई की जाती है, जबकि बाकी स्थानों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता।
3. टूटी सड़कें और जलभराव:
शहर के कई इलाकों, विशेष रूप से सेक्टर-9 मार्केट के पीछे और अन्य स्थानों पर सड़कों की हालत खराब है। सड़कों पर गड्ढे बने हुए हैं और बारिश के दौरान जलभराव की समस्या विकराल रूप ले लेती है।




तीन बड़े विभाग, फिर भी विकास अधूरा
पंचकूला में नगर निगम, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) और पंचकूला मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (PMDA) जैसे तीन प्रमुख विभाग होने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं में सुधार देखने को नहीं मिल रहा है। करोड़ों रुपये के बजट के बावजूद शहरवासियों को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
क्या 25 नए एजेंडा से बदलेगी तस्वीर?
मेयर कुलभूषण गोयल द्वारा प्रस्तुत 25 एजेंडा शहर की स्थिति सुधारने के लिए प्रस्तावित किए गए हैं। अब यह देखने योग्य होगा कि 300 करोड़ रुपये के बजट के बाद क्या नगर निगम इन योजनाओं को प्रभावी रूप से लागू कर पाएगा या नहीं।
क्या इस बार पंचकूला वासियों को विकास का लाभ मिलेगा, या फिर यह बजट भी सिर्फ कागजों पर सिमटकर रह जाएगा? यह सवाल हर नागरिक के मन में बना हुआ है
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